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एक घंटा पहले
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सेना विभाग में बड़ा फेरबदल
अमेरिका इस समय ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष में पूरी तरह उलझा हुआ है, इसी बीच अमेरिकी सेना को एक बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने अपना पद छोड़ने का फैसला किया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की है, लेकिन अभी तक उनका इस्तीफा आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पेंटागन के भीतर रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ उनके कथित मतभेदों की चर्चा जोरों पर है।
व्हाइट हाउस ने सराहे ड्रिस्कॉल के प्रयास
इस्तीफे की खबरों के बीच व्हाइट हाउस की प्रधान उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने डैन ड्रिस्कॉल के अब तक के कार्यकाल की सराहना की है। अन्ना केली ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ड्रिस्कॉल ने राष्ट्रपति ट्रंप के एजेंडे को प्रभावी ढंग से लागू करने और सेना विभाग में उसे आगे बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सेना की तैयारियों और उसकी मारक क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत की प्रक्रिया में सहायता करने में भी उन्होंने अहम योगदान दिया। केली के अनुसार, ड्रिस्कॉल के नेतृत्व और प्रयासों के कारण आज अमेरिकी सेना पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।
पीठ हेगसेथ के साथ तनाव की चर्चा
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि डैन ड्रिस्कॉल का इस्तीफा अचानक नहीं आया है। पिछले कई महीनों से रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ उनके बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच वैचारिक मतभेद इतने गहरे थे कि कई सैन्य अधिकारियों के लिए ड्रिस्कॉल का इस्तीफा अप्रत्याशित नहीं रहा। ईरान के साथ जारी युद्ध और ट्रंप प्रशासन के दौरान पेंटागन से होने वाला यह अब तक का एक और बड़ा और महत्वपूर्ण इस्तीफा माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि प्रशासन अमेरिकी सैन्य ढांचे में व्यापक स्तर पर बड़े बदलाव करने की तैयारी में है।
कौन हैं डैन ड्रिस्कॉल और उनका करियर
डैन ड्रिस्कॉल की पहचान एक पूर्व आर्मी रेंजर और इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक के रूप में रही है। फरवरी 2025 में अमेरिकी सीनेट ने 66-28 के भारी बहुमत से उन्हें सेना सचिव के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके व्यापक सैन्य अनुभव और निवेशक के तौर पर उनकी पृष्ठभूमि को देखते हुए उन पर भरोसा जताया था। ड्रिस्कॉल के करियर के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ येल लॉ स्कूल में सहपाठी होना शामिल है। उन्होंने वेंस के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी और वेंचर कैपिटलिस्ट के तौर पर भी वे काफी सक्रिय रहे हैं।
आधुनिकीकरण और सैन्य निवेश पर जोर
अपने कार्यकाल के दौरान ड्रिस्कॉल ने सेना कर्मियों के जीवन स्तर को सुधारने और उनके लिए बेहतर आवास की सुविधा देने पर काम किया। उन्होंने उपकरणों के आधुनिकीकरण और यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभव के आधार पर नई व्यावसायिक तकनीकों को सेना में अपनाने का खाका तैयार किया। उनकी इन कोशिशों का ही परिणाम था कि निजी कंपनियों ने सैन्य ठिकानों पर डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण खनिज रिफाइनरी और आधुनिक डाइनिंग सुविधाओं जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए 25 अरब डॉलर से ज्यादा की प्रतिबद्धता जताई।
सैन्य नेतृत्व के सामने अनिश्चितता का दौर
यह इस्तीफा उस समय हुआ है जब अमेरिकी सैन्य बल पिछले सात महीने से ईरान के साथ चल रहे युद्ध में सीधे तौर पर उलझे हुए हैं। इससे पहले इसी वर्ष हेगसेथ ने आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज सहित तीन बड़े वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त कर दिया था। गौरतलब है कि जनरल जॉर्ज और ड्रिस्कॉल के बीच काफी अच्छे कामकाजी संबंध थे और वे एक टीम की तरह काम कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रिस्कॉल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है, तो इस नाजुक मोड़ पर सेना के पास स्थायी नागरिक नेतृत्व का अभाव हो जाएगा। साथ ही, जनरल जॉर्ज के स्थायी उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अभी लंबित है, जिससे सैन्य व्यवस्था में नेतृत्व का संकट गहरा सकता है।
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