भारत के AMCA और तेजस Mk-2 कार्यक्रम पर मंडराया संकट, अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस के रुख से बढ़ी मुश्किलें भारत एक घंटा पहले 2
भारत के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA और स्वदेशी तेजस Mk-2 के लिए इंजन आपूर्ति को लेकर जीई एयरोस्पेस के साथ बातचीत में पेच फंस गया है। अमेरिकी कंपनी द्वारा इंजन की कीमतों में भारी वृद्धि और तकनीकी हस्तांतरण की शर्तों को लेकर पैदा हुए गतिरोध ने भारतीय रक्षा परियोजनाओं पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।

भारत के रक्षा सपनों को लगा बड़ा झटका

भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा कार्यक्रमों में से एक, पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। भारतीय वायुसेना के इस भविष्य के लड़ाकू विमान की राह में अब अमेरिकी दिग्गज कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) रोड़े अटकाती नजर आ रही है। दरअसल, इन विमानों के लिए जरूरी F414 इंजन की खरीद और तकनीकी हस्तांतरण को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह से अटक गई है। इस स्थिति ने न केवल AMCA कार्यक्रम, बल्कि भारत के स्वदेशी तेजस Mk-2 और नौसेना के TEDBF (ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर) प्रोजेक्ट्स पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

कीमतों में तीन गुना का भारी इजाफा

डिफेंस के मामलों पर नजर रखने वाली रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने F414 इंजन की कीमत में अप्रत्याशित रूप से लगभग तीन गुना की बढ़ोतरी कर दी है। बताया जा रहा है कि पहले एक इंजन की कीमत करीब 70 से 80 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर लगभग 200 करोड़ रुपये प्रति इंजन कर दिया गया है। कीमतों में यह 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि भारतीय रक्षा बजट और नियोजन के लिए एक बड़ा झटका है। इसी भारी आर्थिक अंतर के कारण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और जीई के बीच चल रही बातचीत वर्तमान में ठप पड़ी है। दोनों पक्षों के बीच मूल्य निर्धारण और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों को लेकर आम सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे भविष्य के सैन्य कार्यक्रमों की समय-सीमा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

तकनीकी हस्तांतरण पर अड़ा पेंच

कीमत के अलावा सबसे बड़ा विवाद तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की शर्तों को लेकर है। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए तकनीक के हस्तांतरण पर जोर देता रहा है, लेकिन जीई एयरोस्पेस इस मामले में काफी कठोर रुख अपना रही है। खबरों के अनुसार, भारत में F414 इंजन की मैन्युफैक्चरिंग लाइन और असेंबली सेटअप स्थापित करने के लिए अमेरिकी कंपनी 800 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की मांग कर रही है। यह अतिरिक्त मांग भारत सरकार के लिए एक बड़ी वित्तीय बाधा बन गई है, और इसी मुद्दे पर दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच लंबी और जटिल चर्चाएं जारी हैं, जिसका अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है।

पुराना विवाद और इंजनों की धीमी आपूर्ति

यह पहला मौका नहीं है जब जीई एयरोस्पेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। इससे पहले तेजस Mk-1A फाइटर जेट्स के लिए F404-IN20 इंजनों की सप्लाई में हुई भारी देरी के कारण भारत काफी नाराज रहा है। भारत ने साल 2021 में कुल 99 इंजन का ऑर्डर दिया था, लेकिन अब तक केवल 6 इंजन ही प्राप्त हुए हैं। इस देरी के कारण HAL ने कंपनी पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। हालांकि, जीई ने आने वाले महीनों में 20 अतिरिक्त इंजन देने का भरोसा दिलाया है, लेकिन पूर्व की इन घटनाओं ने भरोसे की कमी को और गहरा कर दिया है।

क्यों भारत के लिए ये परियोजनाएं हैं महत्वपूर्ण

F414 इंजन केवल एक मशीन नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के रक्षा ढांचे की रीढ़ है। इसके महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • तेजस Mk-2: यह स्वदेशी लड़ाकू विमान पूरी तरह से इसी इंजन पर आधारित है, जिसका काम भारत की हवाई शक्ति को आधुनिक बनाना है।
  • AMCA Mk-1: पांचवीं पीढ़ी के इस स्टील्थ विमान के शुरुआती संस्करण में इसी इंजन का उपयोग किया जाना है।
  • TEDBF: भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोतों के लिए तैयार किए जा रहे ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर जेट भी इसी इंजन की शक्ति से उड़ान भरेंगे।

रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत को कुल मिलाकर 200 से अधिक F414 इंजनों की आवश्यकता होगी। यदि आपूर्ति में देरी होती है या समझौते पर मुहर नहीं लगती, तो भारतीय वायुसेना और नौसेना की तैयारियों में बड़ा अंतराल आ सकता है।

आत्मनिर्भरता की राह में चुनौतियां

भारत सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करके पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना है। AMCA और तेजस जैसी परियोजनाएं इसी विजन का प्रतीक हैं। ऐसे में इंजन जैसे महत्वपूर्ण कलपुर्जों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता और उनकी मनमानी कीमतें भारत के स्वाभिमान और सुरक्षा नीतियों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। हालांकि, HAL ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि जीई के साथ बातचीत सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है और किसी तरह का गतिरोध नहीं है, लेकिन रक्षा गलियारों में चर्चाएं इसके उलट हैं। अंततः, इन परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपनी शर्तों पर इन तकनीकों को हासिल करने में कितना सफल हो पाता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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