उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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प्रयागराज के यातायात के लिए मील का पत्थर
संगमनगरी प्रयागराज के निवासियों के लिए नया साल बेहद खास होने वाला है। शहर की यातायात व्यवस्था को नई गति देने के लिए गंगा नदी पर एक भव्य और आधुनिक सिक्स लेन ब्रिज बनकर तैयार है। मलाक हरहर से म्यौराबाद के बीच बने इस 10 किलोमीटर लंबे पुल का काम अब अपने अंतिम चरणों में है। लगभग साढ़े पांच साल के लंबे निर्माण कार्य और 980 करोड़ रुपये के बड़े बजट से बना यह प्रोजेक्ट न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी एक बड़ी सौगात साबित होगा।
25 दिसंबर को हो सकता है उद्घाटन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर स्थानीय प्रशासन और निर्माण कार्य में जुटी कंपनी पूरी तरह सक्रिय है। एसपीएस कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर परवेज सुल्तान के अनुसार, पुल का करीब 92 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। शेष फिनिशिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है ताकि इसे समय पर पूरा किया जा सके। सूत्रों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस पुल का शुभारंभ आगामी 25 दिसंबर को किया जा सकता है। यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस यानी सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी विशेष अवसर पर पुल को आम जनता के लिए समर्पित करने की योजना है।
एक्स्ट्रा डोज तकनीक से लैस इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना
यह पुल सामान्य निर्माण से काफी अलग और तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है। इसे आधुनिक एक्स्ट्रा डोज तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। इंजीनियरिंग की दृष्टि से यह प्रणाली पारंपरिक गर्डर ब्रिज और केबल स्टेड ब्रिज का एक हाइब्रिड और अधिक मजबूत स्वरूप मानी जाती है। पुल की कुल लंबाई में से मुख्य एक्स्ट्रा डोज हिस्से की लंबाई 860 मीटर है। इस डिजाइन की सबसे बड़ी विशेषता इसके दो पिलरों के बीच का 200 मीटर का स्पान है। निर्माण कंपनी का दावा है कि वर्तमान में पूरे भारत में 200 मीटर के स्पान वाला इस तकनीक का कोई दूसरा पुल नहीं है, जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक इंजीनियरिंग अजूबा बनाता है।
ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस सुरक्षा
पुल की लंबी उम्र और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसमें अत्याधुनिक ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रावधान किया गया है। यह डिजिटल तकनीक पुल की संरचना पर पड़ने वाले हर तरह के दबाव, कंपन और उसकी स्थिति की लगातार निगरानी करेगी। इससे किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी संरचनात्मक समस्या को समय रहते पहचाना जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, अनुबंध के अनुसार निर्माण कंपनी एसपीएस कंस्ट्रक्शन को अगले 10 वर्षों तक इस पुल के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे भविष्य में किसी भी तकनीकी खामी को तुरंत ठीक करना सुनिश्चित होगा।
फाफामऊ के जाम से मिलेगी मुक्ति
इस सिक्स लेन ब्रिज के शुरू होने से सबसे बड़ी राहत फाफामऊ के पुराने पुल पर लगने वाले भीषण जाम से मिलेगी। स्थानीय लोग जो रोजाना काम पर जाने के लिए घंटों तक जाम में फंसते थे, उनके लिए यह सफर अब चंद मिनटों का रह जाएगा। इसके अलावा, प्रयागराज से लखनऊ, अयोध्या और आसपास के अवध क्षेत्र के जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों को एक सुगम मार्ग उपलब्ध होगा। साथ ही, कुंभ, महाकुंभ और हर साल लगने वाले माघ मेले के दौरान संगम तट पर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को भी इस नए पुल से आवागमन में बड़ी सुविधा होगी। यह पुल न केवल भीड़ को कम करेगा बल्कि यात्रा के समय में भी भारी कटौती करेगा, जिससे प्रयागराज के संपूर्ण सड़क नेटवर्क में एक नई जान फूंकने का काम होगा।
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