भारत
3 महीने पहले
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विचारों
नीट मुद्दे पर दिल्ली से पटना तक विरोध
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब दिल्ली के जंतर मंतर से निकलकर पटना और देश के अन्य हिस्सों तक फैल चुका है। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं विपक्ष भी संसद के अंदर और बाहर काफी सक्रिय नजर आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि नीट परीक्षा में कथित धांधली के मुद्दे पर विपक्ष के दो बड़े दलों, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की रणनीति में फर्क देखने को मिल रहा है। जहाँ कांग्रेस शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर पूरी तरह अड़ी है, वहीं सपा सांसद अखिलेश यादव का रुख कुछ अलग है। अखिलेश सदन के भीतर नीट पर व्यापक चर्चा कराने की मांग पर जोर दे रहे हैं।
संसद में कैसे शुरू हुआ विवाद
आज दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो सदन का माहौल काफी गर्म था। अखिलेश यादव अपनी बात रखने के लिए उत्सुक थे, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने सबसे पहले कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को बोलने का अवसर दे दिया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अपनी बात रखी। इस घटनाक्रम से अखिलेश यादव काफी नाराज दिखे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और पूछा कि क्या बीजेपी और कांग्रेस के बीच कोई गुप्त समझौता हो गया है, जिसके तहत विपक्षी दल के तौर पर केवल कांग्रेस को ही बोलने का मौका दिया जा रहा है। इसी दावे ने मौके पर मौजूद केसी वेणुगोपाल को आक्रोशित कर दिया और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
सदन के अंदर का वाकया
- केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई और अपने सांसदों को वेल में आने का इशारा किया।
- जब अखिलेश यादव को बोलने का मौका मिला, तो कांग्रेस की नारेबाजी के बीच उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच साठ-गांठ है, जिसके कारण सपा को अनदेखा किया जा रहा है।
- अखिलेश के आरोपों पर पलटवार करते हुए केसी वेणुगोपाल ने कहा कि आप ऐसा निराधार आरोप कैसे लगा सकते हैं, जबकि उनके नेता के साथ पुलिस ने काफी ज्यादती की है।
- सूत्रों के मुताबिक, इस गरमागरम बहस के दौरान अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए यह तक कह दिया कि राजनीति आपसे नहीं सीखी जा सकती।
- यह पूरी बहस उस समय हुई जब लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हो चुकी थी और सदन के माइक बंद कर दिए गए थे।
अखिलेश यादव ने दी सफाई
हालांकि, बाद में अखिलेश यादव ने वेणुगोपाल के साथ हुई बहस के तीखेपन को कम करने की कोशिश की। कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन में सपा की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि यह सही है कि उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं थी, लेकिन जब कांग्रेस ने बुलाया, तो उन्होंने अपने सभी कार्य छोड़कर वहां पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने माना कि विपक्ष के भीतर आपसी तालमेल को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह अपने मंत्रियों या सहयोगियों से इस्तीफा लेने की स्थिति में भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम यह तो स्वीकार करना ही चाहिए कि परीक्षा प्रणाली में गलती हुई है। उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में आज कांग्रेस, सपा और टीएमसी समेत विपक्षी सांसदों ने संसद के भीतर काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया।
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