अजमेर जेल में जगन गुर्जर की हत्या: रेडियो के शोर में दबी चीखें, आरोपी विष्णु उर्फ बौना से पूछताछ में बड़े खुलासे राजस्थान एक महीने पहले 72
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या मामले में नए खुलासे हुए हैं, जहां वारदात के वक्त तेज रेडियो बजने के कारण चीखें बाहर नहीं आ सकीं।

अजमेर की अति-सुरक्षित यानी हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की सनसनीखेज हत्या के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामला और उलझता जा रहा है। ताजा जांच में यह बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है कि जब इस वारदात को अंजाम दिया जा रहा था, तब जेल की बैरकों में बहुत तेज आवाज में रेडियो बज रहा था। इस तेज आवाज के कारण जगन गुर्जर की संघर्ष के दौरान निकली चीखें या मदद की गुहार बैरक से बाहर तक नहीं पहुंच पाईं और उसकी जान ले ली गई।

आरोपी विष्णु उर्फ बौना से पुलिस की पूछताछ

इस मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु उर्फ बौना को प्रोडक्शन वारंट पर जेल से बाहर निकाला है। पुलिस हिरासत में उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना गुनाह कबूल करते हुए दावा किया है कि उसने जेल के भीतर अपना दबदबा और खौफ कायम करने के लिए जगन गुर्जर की हत्या की। हालांकि, जांच अधिकारी केवल आरोपी के बयानों को ही सच नहीं मान रहे हैं और मामले की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं।

साजिश और तकनीकी सुबूतों की जांच

पुलिस हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई जानने के लिए अब वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है। जांच टीम को फिलहाल निम्नलिखित महत्वपूर्ण रिपोर्ट का इंतजार है:

  • विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट
  • फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की रिपोर्ट
  • अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य

इसके अलावा, पुलिस इस बात की भी गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या यह हत्या पूरी योजना के साथ की गई थी। जांच का एक मुख्य पहलू यह भी है कि वारदात से पहले क्या जगन गुर्जर को कोई नशीला पदार्थ दिया गया था ताकि वह विरोध न कर सके। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि इस पूरी साजिश में विष्णु के साथ जेल के अंदर या बाहर का कोई और व्यक्ति तो शामिल नहीं था।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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