अजमेर का दरगाह बाजार: यहां गूगल मैप भी घुटने टेक देता है, संकरी गलियों में भटक जाते हैं लोग राजस्थान एक महीने पहले 64
अजमेर के दरगाह बाजार और आसपास के पुराने मोहल्लों की बनावट इतनी जटिल है कि तकनीक भी यहाँ मात खा जाती है। डिजिटल नेविगेशन की जगह यहाँ स्थानीय लोगों की सलाह ही काम आती है।

गूगल मैप भी बेअसर

आज के डिजिटल युग में, अनजान रास्तों पर सफर करना काफी सरल हो गया है। कहीं भी जाने के लिए हम बिना सोचे समझे गूगल मैप का सहारा लेते हैं। तकनीक पर यह निर्भरता हमें गंतव्य तक पहुँचाने में मदद करती है, लेकिन राजस्थान के अजमेर शहर में एक ऐसा इलाका है, जहाँ यह आधुनिक तकनीक भी पूरी तरह से फेल हो जाती है। हम बात कर रहे हैं दरगाह बाजार और उसके आसपास स्थित बेहद पुरानी और जटिल गलियों की, जहाँ रास्ता ढूँढना किसी चुनौती से कम नहीं है।

मोटरसाइकिल निकलना भी मुश्किल

इस क्षेत्र की गलियां इतनी ज्यादा तंग हैं कि वहां से गुजरना एक कला जैसा है। स्थिति यह है कि यदि दो मोटरसाइकिलें आमने-सामने आ जाएं, तो उनका एक साथ निकलना भी नामुमकिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में एक वाहन चालक को रुकना पड़ता है ताकि दूसरा वहां से गुजर सके। इन गलियों में चार पहिया वाहनों या किसी भी तरह की बड़ी गाड़ी के जाने की कल्पना करना भी बेमानी है। यही कारण है कि यहां आने वाले वाहन चालकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

भूलभुलैया जैसे मोहल्ले

दरगाह बाजार के साथ-साथ घी मंडी, धान मंडी और मुंदड़ी मोहल्ला जैसे पुराने इलाकों का भी यही हाल है। यहां की गलियां आपस में इस तरह गुंथी हुई हैं कि पहली बार आने वाला कोई भी व्यक्ति पल भर में रास्ता भटक सकता है। गूगल मैप अक्सर उन रास्तों का संकेत देता है जो या तो बहुत संकरे होते हैं या फिर वहां गाड़ी लेकर पहुंचना असंभव होता है। कई बार लोग मैप के भरोसे आगे बढ़ तो जाते हैं, लेकिन आगे जाकर रास्ता बंद मिलने पर उन्हें उल्टे पांव वापस लौटना पड़ता है।

तकनीक बनाम अनुभव

क्षेत्रीय निवासियों का मानना है कि इन संकरी गलियों के भीतर मोबाइल नेटवर्क की भी बड़ी समस्या है। कई जगहों पर इंटरनेट सिग्नल इतने कमजोर हो जाते हैं कि डिजिटल मैप अपडेट होना बंद कर देते हैं। इस वजह से यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के पास तकनीकी सहायता के बजाय स्थानीय लोगों से पूछने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। वे अक्सर राहगीरों या दुकानदारों की मदद से ही अपनी सही मंजिल तक पहुंच पाते हैं।

एक ऐतिहासिक पहचान

अपनी इन जटिल गलियों, पुरानी इमारतों और पारंपरिक बाजारों के कारण दरगाह बाजार का यह इलाका अजमेर की एक विशेष पहचान बन गया है। आधुनिकता की दौड़ से दूर, यह इलाका आज भी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि हर जगह तकनीक काम नहीं आती। आज के दौर में भी यहां स्थानीय अनुभव और लोगों की समझ किसी भी डिजिटल नेविगेशन टूल से अधिक भरोसेमंद और सटीक साबित होती है। इस बाजार की बनावट ही इसे दुनिया के अन्य व्यावसायिक केंद्रों से बिल्कुल अलग और ऐतिहासिक बनाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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