गुजरात
एक घंटा पहले
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गुजरात एटीएस की बड़ी कामयाबी
गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी एटीएस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अभियान में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का खास सहयोगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर का ड्रग्स तस्कर सलीम इस्माइल डोला कानून के शिकंजे में आ गया है। उसे 438.64 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन ड्रग्स की बरामदगी से जुड़े एक गंभीर मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह नशीला पदार्थ वर्ष 2022 में वडोदरा जिले की एक अवैध फैक्ट्री से जब्त किया गया था। सलीम डोला काफी लंबे समय से जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। उसे इसी साल के शुरुआती महीनों में तुर्किये से भारत वापस लाया गया था, जिसके बाद अब गुजरात एटीएस ने आधिकारिक तौर पर उसे इस मामले में अपनी हिरासत में लिया है।
वडोदरा ड्रग्स फैक्ट्री कांड और सलीम डोला
गुजरात एटीएस के अनुसार, यह पूरी घटना 1 दिसंबर 2022 की है, जब वडोदरा जिले के सिंधरोत गांव के नजदीक एक फैक्ट्री पर छापामार कार्रवाई की गई थी। उस दौरान वहां से 87.728 किलोग्राम मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 438.64 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस मामले में अब तक 10 अलग-अलग आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गहन जांच-पड़ताल के दौरान सलीम डोला का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में उभरकर सामने आया। एटीएस के अफसरों का मानना है कि वह विदेश में बैठकर ही इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क की कमान संभाल रहा था। उसकी भूमिका केवल माल को बेचने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वह ड्रग्स बनाने में काम आने वाले प्रतिबंधित रसायनों की सप्लाई और उसकी खरीद-फरोख्त में भी सीधे तौर पर संलिप्त था। फिलहाल एटीएस उससे पूछताछ कर रही है ताकि ड्रग्स बनाने के लिए केमिकल कहां से आता था, पैसों का लेनदेन कैसे होता था और इस पूरे रैकेट से जुड़े अन्य चेहरे कौन हैं, इसकी विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।
कंटेनरों के जरिए तस्करी का जाल
जांच में सलीम डोला के तस्करी करने के तरीके के बारे में भी हैरान करने वाली जानकारियां मिली हैं। आरोप है कि उसका पूरा सिंडिकेट कानूनी रूप से विदेश भेजे जाने वाले सामान्य सामान के कंटेनरों में बड़ी चालाकी से नशीले पदार्थ छिपाकर तस्करी करता था। वे जिन देशों में अपना माल भेजते थे, वहां बाकायदा फर्जी कंपनियां खड़ी कर रखी थीं। इन कंपनियों की आड़ में ही वे अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे। वडोदरा स्थित फैक्ट्री में तैयार होने वाली मेफेड्रोन को पहले मुंबई लाया जाता था, जहां से इसे सलीम डोला के सहयोगियों को सौंपा जाता था और फिर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए इसे आगे भेज दिया जाता था।
मुंबई से तुर्किये तक का सफर
सलीम डोला काफी समय से भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निशाने पर था। वह मुंबई से फरार होकर पहले दुबई पहुंचा और उसके बाद उसने केन्या सहित कई देशों में अपनी शरण ली थी। जब भारतीय एजेंसियों ने उस पर दबाव बढ़ाया, तो इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। मार्च 2024 में इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद उसे तुर्किये में पकड़ लिया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी उसे भारत लेकर आई। आखिरकार 31 अक्टूबर को गुजरात एटीएस ने उसे औपचारिक रूप से इस मामले में गिरफ्तार कर लिया।
इकबाल मिर्ची से पुराना संबंध
सलीम डोला का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह 1990 के दशक में बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्कर इकबाल मिर्ची के लिए भी काम करता था। समय के साथ उसने अपने अलग नेटवर्क बना लिए और वह खुद तस्करी का सरगना बन गया। देश भर में उसके खिलाफ करीब एक दर्जन मामले ड्रग्स तस्करी से जुड़े दर्ज हैं। इससे पहले वह 1998 में मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 40 किलोग्राम मैंड्रेक्स के साथ पकड़ा गया था। वहीं 2013 में 79 किलोग्राम चरस के मामले में और 2018 में 1,000 करोड़ रुपये की फेंटानिल ड्रग्स से जुड़े मामले में भी वह जांच के दायरे में आ चुका है। उसके कारनामों को लेकर एनसीबी, डीआरआई और मुंबई पुलिस जैसी प्रमुख एजेंसियां भी उसके खिलाफ कई बार कार्रवाई कर चुकी हैं।
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