इंस्टाग्राम मैसेज और उम्र का गणित: 18 साल 7 दिन की उलझन में अटका रेप केस गुजरात एक घंटा पहले 3
गुजरात के आणंद में एक नाबालिग से रेप और पॉक्सो मामले में कानूनी लड़ाई एक इंस्टाग्राम मैसेज की टाइमलाइन पर आकर टिक गई है। हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट में अनिश्चितता के चलते मामले को वापस जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास भेज दिया है।

आणंद के पॉक्सो मामले में कानूनी पेंच

गुजरात के आणंद में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो यानी POCSO एक्ट के तहत दर्ज गंभीर मामले में न्याय की प्रक्रिया एक छोटे से डिजिटल सुराग पर आकर ठहर गई है। पूरा कानूनी विवाद अब इस बात पर सिमट गया है कि आरोपी घटना के वक्त नाबालिग था या बालिग। इस केस का फैसला अब केवल सबूतों पर नहीं, बल्कि एक इंस्टाग्राम मैसेज के सटीक समय और उसकी प्रकृति पर टिका है। मामला इतना जटिल हो गया है कि गुजरात हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और फाइल को फिर से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यानी JJB के पास भेजना पड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर

यह मामला साल 2023 में दर्ज हुई एक एफआईआर से उपजा है, जिसमें एक पीड़ित पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ दो युवकों ने दुष्कर्म किया और लंबे समय तक उसे प्रताड़ित किया। शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2023 में शारीरिक शोषण की घटना हुई, जिसके बाद आरोपी लगातार लड़की को इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक मैसेज भेजकर मानसिक रूप से परेशान करते रहे। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को नामजद किया था। पहला आरोपी, जिसका जन्म साल 2003 में हुआ था, उस पर पॉक्सो अदालत में मुकदमा चलना पूरी तरह तय है। असली विवाद दूसरे आरोपी के उम्र संबंधी दावों को लेकर खड़ा हुआ है, जिसका जन्म 15 जुलाई 2005 को हुआ था।

अदालत का शुरुआती नजरिया और विवादित मैसेज

दूसरे आरोपी का तर्क है कि घटना के समय उसकी उम्र 17 साल 7 महीने थी, इसलिए उसे कानून की नजर में किशोर माना जाना चाहिए और उस पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में ही सुनवाई होनी चाहिए। हालांकि, जनवरी 2024 में जब चिल्ड्रन्स कोर्ट ने पॉक्सो अदालत के रूप में इस मामले पर सुनवाई की, तो उसने आरोपी को बालिग मानते हुए ट्रायल के आदेश दे दिए। कोर्ट ने इसके लिए 22 जुलाई 2023 को भेजे गए एक आखिरी आपत्तिजनक मैसेज को आधार बनाया। उस तारीख को आरोपी की उम्र 18 साल और 7 दिन हो चुकी थी। अदालत ने माना कि शारीरिक शोषण और सोशल मीडिया के जरिए लगातार की जा रही प्रताड़ना एक निरंतर चलने वाला अपराध है, इसलिए आखिरी मैसेज की तारीख ही आरोपी की बालिगता तय करने का पैमाना होनी चाहिए।

हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और नई जांच

निचली अदालत के इस फैसले को आरोपी के पिता ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि अपराध की अंतिम तारीख का निर्धारण फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर किया जाए। FSL रिपोर्ट में यह संकेत मिला कि आरोपी के मोबाइल से आखिरी मैसेज उसके बालिग होने के एक हफ्ते बाद भेजा गया था। इसी आधार पर स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में कार्यवाही जारी रही और FSL अधिकारी से जिरह भी की गई। लेकिन ट्रायल पूरा होने से पहले बचाव पक्ष ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सबूतों पर उठा सवाल और भविष्य की दिशा

आरोपी के वकीलों ने तर्क दिया कि FSL रिपोर्ट और अधिकारी के बयानों में कई विसंगतियां हैं। भले ही मैसेज का टाइमस्टैम्प 22 जुलाई 2023 का हो, लेकिन रिपोर्ट में यह बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है कि वह मैसेज किसे भेजा गया था और क्या वह वास्तव में पीड़ित लड़की को ही मिला था। हाईकोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लिया और माना कि मैसेज की प्राप्ति को लेकर बनी अनिश्चितता अपराध की अंतिम तिथि तय करने के आधार को कमजोर करती है।

अब इस दुर्लभ मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को फॉरेंसिक टीम के नए इनपुट्स का इंतजार है। टीम को यह साबित करना होगा कि विवादित मैसेज की सटीक तारीख क्या थी और वह किसे भेजा गया था। बचाव पक्ष का पूरा जोर इस बात पर है कि शारीरिक शोषण के वास्तविक समय के दौरान आरोपी ने कानूनी तौर पर 18 साल की दहलीज पार नहीं की थी।

कानूनी परिणाम और संभावित सजा

इस मामले का कानूनी परिणाम आरोपी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि FSL रिपोर्ट की जांच में आरोपी बालिग साबित होता है, तो उसे पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद जैसी सख्त सजा का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, अगर यह साबित हो जाता है कि घटना के समय वह नाबालिग था, तो कानून के तहत उसे अधिकतम 3 साल के सुधार गृह में रहने की सजा ही हो सकती है। अब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को यह तय करना है कि क्या यह मामला सेशन कोर्ट के लिए है या फिर बोर्ड खुद इस पर सुनवाई करेगा। यह मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आधुनिक दौर के डिजिटल साक्ष्य किस तरह न्यायपालिका के लिए नए और जटिल प्रश्न खड़े कर रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप