आगर मालवा में सरकारी जमीन पर चला प्रशासन का पीला पंजा: 100 से ज्यादा मकान जमींदोज, कार्रवाई के बाद बढ़ा सियासी पारा मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 73
मध्य प्रदेश के आगर मालवा में प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मिलकर करीब 25 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। हालांकि, 100 से ज्यादा कच्चे मकान गिराए जाने के बाद इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखा राजनीतिक ड्रामा शुरू हो गया।

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में प्रशासन ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। यहाँ उज्जैन-झालावाड़ नेशनल हाईवे के पास मौजूद करीब 25 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है। इस महा-अभियान के दौरान प्रशासन के बुलडोजर ने 100 से अधिक कच्चे मकानों और झोपड़ियों को जमींदोज कर दिया। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 150 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इसके साथ ही, प्रशासनिक अमले के लगभग 100 अधिकारी और कर्मचारी भी पूरी मुस्तैदी के साथ मौके पर डटे रहे। यह कार्रवाई सुबह से शुरू होकर पूरे दिन चलती रही, जिससे इलाके में भारी हड़कंप मच गया।

सर्व हिंदू समाज के प्रदर्शन के बाद त्वरित कार्रवाई

इस बड़ी कार्रवाई के पीछे एक दिन पहले हुए भारी विरोध प्रदर्शन को मुख्य वजह माना जा रहा है। दरअसल, इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले सर्व हिन्दू समाज ने सरकारी जमीन पर किए गए इस अवैध कब्जे को तुरंत हटाने की पुरजोर मांग की थी। इसके विरोध में लोगों ने उज्जैन-झालावाड़ नेशनल हाईवे पर जमकर चक्काजाम किया और बड़ा प्रदर्शन भी किया था। इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और अगले ही दिन सुबह-सुबह भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गया। स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने यह त्वरित कदम प्रदर्शनकारियों के भारी दबाव के बाद ही उठाया है।

पीड़ितों ने लगाया एकतरफा कार्रवाई का गंभीर आरोप

एक तरफ जहां प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर की गई है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि बुलडोजर चलाने से पहले पूरे इलाके में मुनादी कराई गई थी और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जगह खाली करने की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन बेघर हुए लोगों ने प्रशासन के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान समेटने और घर खाली करने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रशासन ने उनके साथ न्याय नहीं किया और बिना किसी पूर्व तैयारी के एकतरफा तरीके से उनके आशियाने उजाड़ दिए।

शाम को थमा बुलडोजर, शुरू हुआ सियासी घमासान

दिनभर चली इस तोड़फोड़ के बाद शाम होते-होते इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया, जिसके बाद प्रशासन को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। जब प्रशासनिक टीम अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा तालाब क्षेत्र में पहुंची, तो वहां स्थानीय लोगों का भारी विरोध शुरू हो गया। इस हंगामे की खबर मिलते ही कांग्रेस की जिला अध्यक्ष विजयलक्ष्मी तंवर तुरंत मौके पर पहुंचीं और प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में वहीं धरने पर बैठ गईं। माहौल को बिगड़ता देख भाजपा के जिला अध्यक्ष ओम मालवीय भी घटना स्थल पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों दलों के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच काफी लंबी और तीखी चर्चा हुई। अंततः बिगड़ते हालात और हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल के लिए अपनी कार्रवाई को स्थगित करने का फैसला किया।

प्रधानमंत्री आवास और पट्टे का दावा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

हंगामे के दौरान बड़ा तालाब क्षेत्र के रहवासियों ने हैरान करने वाले दावे किए। लोगों का कहना था कि वे अवैध रूप से वहां नहीं रह रहे हैं, बल्कि उनके पास उस जमीन के वैध पट्टे मौजूद हैं। इतना ही नहीं, कुछ निवासियों ने यह भी बताया कि उनके मकानों का निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ही कराया जा रहा था, ऐसे में उन्हें अवैध बताकर उजाड़ना पूरी तरह से गलत है। इसी सियासी और प्रशासनिक घमासान के बीच सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और एक वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बेघर हुई बेबस महिला भाजपा जिला अध्यक्ष ओम मालवीय के पैर पकड़कर फूट-फूटकर रो रही है और अपना आशियाना बचाने की गुहार लगा रही है। इस भावुक कर देने वाले वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है। हालांकि, तमाम विरोधों के बावजूद प्रशासन अभी भी अपने इस रुख पर अड़ा हुआ है कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और वैध तरीके से की गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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