घुसपैठियों पर कार्रवाई पर भड़के अधीर रंजन चौधरी, बोले- 'हमने तो कसाब को भी खिला-पिलाकर जिंदा रखा था'
राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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देश की सीमाओं की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार के सख्त रवैये को लेकर एक बार फिर राजनीतिक टकराव गहरा गया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक विवादित बयान देकर इस बहस को और तेज कर दिया। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने इसकी तुलना मुंबई आतंकी हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब तक से कर डाली।
चौधरी ने केंद्र की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हिंदुस्तान में कसाब जैसे खूंखार आतंकी को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत खिला-पिलाकर जिंदा रखा गया था, तो फिर इन घुसपैठियों के साथ इतना अमानवीय व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद वोटबैंक की राजनीति को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
कार्रवाई को बताया अमानवीय
मीडिया से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अगर किसी को खुले आसमान के नीचे बारिश और चिलचिलाती धूप झेलते हुए खाली जमीन पर छोड़ दिया जाए, तो यह पूरी तरह अमानवीय है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि क्या देश चलाने के लिए हम इतने क्रूर और निर्दयी बन जाएंगे।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि वह कतई नहीं चाहते कि बांग्लादेशी घुसपैठिए हिंदुस्तान में रहें, लेकिन उनके साथ अपराधियों या जानवरों जैसा सलूक नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक सरकार को या तो इन लोगों को होल्डिंग सेंटर्स में सुरक्षित रखना चाहिए या फिर सीधे बांग्लादेश भेजने का कोई कूटनीतिक रास्ता निकालना चाहिए।
मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की वकालत
इस पूरे प्रकरण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पैरवी करते हुए चौधरी ने एक नया पहलू जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को संयुक्त राष्ट्र (UN) में जाकर इस गंभीर मामले को रखना चाहिए और दुनिया को बताना चाहिए कि ये घुसपैठिए हमारे देश में अवैध रूप से रह रहे हैं तथा बांग्लादेश की सरकार इन्हें वापस लेने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि ये लोग 'नो मैन्स लैंड' पर दिन-रात बिताने को मजबूर हैं।
आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र सरकार से यह भी मांग की कि देश में कुल कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं, इसका आधिकारिक और सटीक आंकड़ा जनता के सामने रखा जाए। उनका कहना था कि घुसपैठियों पर होने वाली हर सख्त कार्रवाई से विपक्षी खेमे में किस कदर बेचैनी पैदा होती है, यह उनके बयान से साफ झलक गया।
बयान की प्रमुख बातें
- कसाब से तुलना: चौधरी ने कहा कि जब भारत ने मुंबई हमले के आतंकी अजमल कसाब तक को पाल-पोसकर और खिला-पिलाकर जिंदा रखा था, तो घुसपैठियों के साथ अमानवीय बर्ताव क्यों।
- कार्रवाई अमानवीय बताई: भीषण गर्मी और मूसलाधार बारिश के बीच घुसपैठियों को खुले आसमान के नीचे नो मैन्स लैंड पर छोड़ना पूरी तरह क्रूरता है।
- UN में मुद्दा उठाने की सलाह: केंद्र इस मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाए और बताए कि बांग्लादेश अपने नागरिकों को वापस स्वीकार नहीं कर रहा।
- आंकड़े सार्वजनिक करने की चुनौती: सरकार साफ करे कि इस वक्त देश के भीतर कुल कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं।
- होल्डिंग सेंटर की पैरवी: घुसपैठियों को देश में रखने के पक्ष में न होते हुए भी उन्होंने कहा कि सरकार इन्हें गरिमा के साथ होल्डिंग सेंटर्स में रखे या समझौते के जरिए वापस भेजे।
सवाल-जवाब
अधीर रंजन चौधरी ने घुसपैठ के मुद्दे पर कसाब का जिक्र क्यों किया?
उन्होंने केंद्र की कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए कसाब का उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि जब भारत ने कसाब जैसे खूंखार विदेशी आतंकी को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत खिला-पिलाकर जिंदा रखा, तो इन घुसपैठियों के खिलाफ बिना किसी मानवीय दृष्टिकोण के सीधे बलपूर्वक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
अवैध प्रवासियों को लेकर उन्होंने सरकार से क्या मांग की?
चौधरी ने मांग की कि केंद्र देश में मौजूद सभी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का सटीक आंकड़ा जनता के सामने रखे। साथ ही जब तक उन्हें डिपोर्ट नहीं किया जाता, तब तक उन्हें खुले आसमान के नीचे नो मैन्स लैंड पर छोड़ने के बजाय सुरक्षित होल्डिंग सेंटर्स में रखा जाए।
बांग्लादेश की भूमिका पर उन्होंने क्या कूटनीतिक रास्ता सुझाया?
उनका कहना था कि बांग्लादेश सरकार अपने नागरिकों को वापस लेने से कतराती है, इसलिए भारत को उसके साथ सीधे द्विपक्षीय समझौता करना चाहिए। बात न बनने पर भारत को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर जाकर इस संकट का अंतरराष्ट्रीय समाधान तलाशना चाहिए।
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