पश्चिम बंगाल
2 घंटे पहले
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कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को CID की एक टीम एक बार फिर उनके आवास पर पहुंची। इससे पहले भी जांच एजेंसी उनसे कई घंटे तक सवाल-जवाब कर चुकी है और अब उन्हें 14 जून को दोबारा हाजिर होने का नोटिस थमाया गया है। CID की यह सक्रियता ऐसे वक्त बढ़ी है, जब अभिषेक पहले से ही कई विवादों और जांचों से घिरे हुए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान को लेकर भी उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
चुनावी बयान पर FIR और अभिषेक के तीखे सवाल
चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि 4 मई को नतीजे आने के बाद बंगाल में DJ बजेगा और जो लोग ज्यादा उछल-कूद कर रहे हैं, उन्हें सबक सिखाया जाएगा। इसी बयान को आधार बनाकर चुनाव आयोग के निर्देश पर उनके विरुद्ध FIR दर्ज की गई थी, जिसके सिलसिले में CID ने उन्हें पूछताछ का नोटिस भेजा। इस मसले पर पहली बार मीडिया के सामने आते हुए अभिषेक ने बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों को कठघरे में खड़ा किया।
'फिर अमित शाह पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई'
टीएमसी नेता ने तर्क दिया कि जिस समय उन्होंने यह बयान दिया, तब बंगाल की कानून-व्यवस्था चुनाव आयोग के अधीन थी, इसी कारण उनके खिलाफ कदम उठाया गया। अभिषेक का कहना था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 'तृणमूल कार्यकर्ताओं को उल्टा लटकाकर सीधा करने' जैसी बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि अगर उनके खिलाफ मुकदमा हो सकता है, तो शाह पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें केवल टीएमसी नेताओं के ही बयान सुनाई पड़ते हैं।
फर्जी हस्ताक्षर मामले में लंबी पूछताछ
विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में भी CID ने बुधवार को अभिषेक बनर्जी से करीब साढ़े 5 घंटे तक पूछताछ की थी। जांच एजेंसी ने उन्हें 14 जून को एक बार फिर पूछताछ के लिए तलब किया है। लगातार चल रही जांच और पूछताछ के चलते राजनीतिक हलकों में उनके इर्द-गिर्द चर्चाएं तेज हो गई हैं।
'कल्याण बनर्जी को मुझे डांटने का पूरा हक'
कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के मुकदमे की पैरवी करने से इनकार कर दिया है, ऐसे में अभिषेक ने उनके साथ अपने रिश्तों को सामान्य दिखाने की कोशिश की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी की आलोचना को उन्होंने बुरा नहीं माना है। अभिषेक के मुताबिक कल्याण बनर्जी उम्र में उनसे बड़े और वरिष्ठ नेता हैं तथा बचपन से उन्हें देखते आए हैं, इसलिए उन्हें डांटने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी के प्रति उनके मन में कोई नाराजगी या गुस्सा नहीं है और वह हमेशा उनका सम्मान करते रहेंगे।
विरोधियों का पलटवार और कई सवाल
हालांकि अभिषेक की इस सफाई पर उनके विरोधी सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह सचमुच कल्याण बनर्जी का इतना आदर करते हैं, तो आधी रात को उनके बेटे को फोन किसने किया था। यह भी पूछा जा रहा है कि जिन मामलों की पैरवी कल्याण बनर्जी कर रहे थे, उनसे उन्हें किसने हटाया और उनके जूनियर वकील को अभिषेक का प्रतिनिधि किसने बनाया। विरोधियों का आरोप है कि टीएमसी छोड़ने वाले कई सांसदों और विधायकों ने भी अभिषेक बनर्जी पर अपमानित करने के आरोप लगाए थे।
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