व्यापार
एक घंटा पहले
3
विचारों
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेसर्स अंसल प्रॉपर्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की परियोजना सुशांत गोल्फ सिटी के हजारों घर खरीदारों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से धोखाधड़ी और अनियमितताओं का दंश झेल रहे लगभग 5000 होम बायर्स को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में एक अहम फैसला लिया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना को पूरा करने के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए इस पूरी टाउनशिप को अपने नियंत्रण में लेगा।
प्राधिकरण इस परियोजना के पूर्ण विकास का प्रस्ताव अब माननीय नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT के समक्ष पेश करेगा। एलडीए द्वारा इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर लेने से उन सभी वैध आवंटियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी, जो वर्षों से अपने घर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इस कदम से न केवल मकानों और भूखंडों का कब्जा मिलना आसान होगा, बल्कि पूरी टाउनशिप में जो बुनियादी और अवस्थापना संबंधी सुविधाएं अधूरी पड़ी थीं, उन्हें भी पूरा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
एलडीए करेगा वित्तीय प्रबंधन
लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया NCLT के माध्यम से पूरी की जाएगी। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना की अधिकतम संभावित देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि, वास्तविक देनदारी का सटीक ब्यौरा IRP यानी इंट्रिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट हो पाएगा। इस काम को आगे बढ़ाने के लिए एलडीए को सरकार से सीड कैपिटल के तौर पर फंड उपलब्ध कराया जाएगा। प्राधिकरण इस राशि को बाद में नए भूखंडों की बिक्री और परियोजना से होने वाली अन्य आय के जरिए शासन को वापस लौटा देगा।
मेसर्स अंसल द्वारा की गई गड़बड़ियों की जांच के लिए लखनऊ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई थी। इसी समिति की रिपोर्ट के बाद एलडीए ने पूरी कार्ययोजना तैयार की थी, जिसे कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है। उपाध्यक्ष के मुताबिक, अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने और निवेशकों की देनदारियों के निस्तारण सहित पूरे प्रोजेक्ट पर अनुमानित खर्चा 5000 करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है।
वैध आवंटियों के हितों की सुरक्षा
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन लोगों को होगा जिनके पास अंसल प्रॉपर्टीज के वैध आवंटन पत्र हैं या जिनकी रजिस्ट्री पहले ही हो चुकी है। प्राधिकरण का कहना है कि अब नियमों के दायरे में रहकर हर वास्तविक खरीदार को उनका भवन या भूखंड उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम उन परिवारों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है जो बीते कई वर्षों से अनिश्चितता के माहौल में जी रहे थे।
अंसल की धोखाधड़ी का काला चिट्ठा
जांच में मेसर्स अंसल प्रॉपर्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर की गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी सामने आई है। कंपनी ने न केवल घर खरीदारों के साथ खेल किया, बल्कि सरकारी महकमों को भी धोखा दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने ग्राम समाज और नगर निगम की लगभग 164 हेक्टेयर जमीन को अवैध तरीके से बेच दिया। इतना ही नहीं, कंसोर्टियम की जमीन के साथ भी फर्जीवाड़ा किया गया। सुरक्षा के तौर पर एलडीए के पास अंसल ने 3489 भूखंड बंधक रखे थे, ताकि काम न होने पर प्राधिकरण उन्हें बेचकर विकास कार्य करवा सके, लेकिन अंसल ने इनमें से भी 2747 भूखंडों को बेच डाला। इन तमाम अनियमितताओं के चलते एलडीए ने कंपनी के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई है।
बुनियादी ढांचे की कमी
टाउनशिप में विकास की स्थिति बेहद दयनीय है। अंसल को यहां 440 केवीए और 220 केवीए के सब-स्टेशन बनाने थे, लेकिन एक भी स्टेशन नहीं बना। करीब 50 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क अधूरा पड़ा है। पानी की पाइपलाइन, सीवर, पार्क और ड्रेनेज सिस्टम जैसी जरूरी सुविधाएं भी कागजों पर ही सिमट कर रह गई हैं।
विकास कार्यों पर खर्च होंगे 2216 करोड़ रुपये
एलडीए के आकलन के मुताबिक, टाउनशिप में अधूरे कार्यों को पूरा करने में कुल 2216.91 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका विवरण इस प्रकार है:
- पॉकेट-1 से पॉकेट-4 तक सुविधाओं के लिए: 453.10 करोड़ रुपये।
- पॉकेट-5 के विकास कार्यों के लिए: 1,126.52 करोड़ रुपये।
- रेलवे ओवरब्रिज के शेष कार्यों के लिए: 114.28 करोड़ रुपये।
- सब-स्टेशन के निर्माण के लिए: 523 करोड़ रुपये।
Comments
0 comment