उपनाम: पर्यावरण अनुकूल
भागलपुर की नई पहचान: बांस के आकर्षक सामानों से सज रहे हैं घर
भागलपुर का एक गांव बांस से बने सजावटी सामानों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। लोग पारंपरिक सजावट को छोड़कर अब पर्यावरण के अनुकूल बांस के उत्पादों को अपना रहे हैं।
पुरानी टी-शर्ट फेंकने की गलती न करें, इन 7 तरीकों से घर के कामों में करें इस्तेमाल
पुरानी और बेकार समझी जाने वाली टी-शर्ट को घर में दोबारा इस्तेमाल करके आप अपने खर्च को कम कर सकते हैं। जानिए कैसे पुरानी टी-शर्ट को अलग-अलग चीजों में बदला जा सकता है।
प्लास्टिक और स्टील को पीछे छोड़ मिट्टी की बोतलें फिर बनीं पसंद, गर्मी में बढ़ी मांग से कुम्हारों की कमाई में उछाल
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में कुम्हार आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक की मदद से मिट्टी की आकर्षक बोतलें बना रहे हैं, जिनकी बढ़ती मांग से उन्हें रोजाना हजारों रुपये की कमाई हो रही है। बाजार में ये बोतलें 150 से 200 रुपये तक बिक रही हैं।
कभी ठेले पर बांस का सामान बेचते थे, अब 3 करोड़ का कारोबार—पूर्णिया के मां-बेटे की अनूठी दास्तां
पूर्णिया की आशा अनुरागिनी और उनके बेटे सत्यम सुंदरम ने महज 15 हजार रुपये से बांस के पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का कारोबार शुरू किया और आज उनका सालाना टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।