उपनाम: पारंपरिक कारीगरी
प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के दौर में भी जीवंत है करौली के हटवारा बाजार की लकड़ी कारीगरी
करौली का हटवारा बाजार आज भी पारंपरिक लकड़ी के खिलौनों और घरेलू वस्तुओं की पहचान बनाए हुए है, जो 10 से 20 परिवारों की आजीविका का सहारा हैं। महंगाई के बावजूद यहां 20 से 100 रुपये तक के हस्तनिर्मित खिलौने उपलब्ध हैं।
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एक महीने पहले
105 साल पुरानी टेलर शॉप: कभी ₹1 में सिलती थी पैंट, अब तीसरी पीढ़ी के हाथ में कारोबार की कमान
जमशेदपुर के बिष्टुपुर में स्थित एच.के. भौमिक टेलर्स पिछले 105 साल से बेहतरीन कारीगरी की मिसाल बनी हुई है। रेडीमेड कपड़ों के दौर में भी इस दुकान को परिवार की तीसरी पीढ़ी संभाल रही है और ग्राहकों का भरोसा कायम है।
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एक महीने पहले