उपनाम: पूजा के नियम
जन्माष्टमी के दौरान पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें, जानिए पूजा और व्रत के नियम
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना और पूजा करना महिलाओं के लिए एक सामान्य जिज्ञासा का विषय है। आइए जानते हैं कि इस दौरान किन नियमों का पालन कर आप श्रीकृष्ण की भक्ति कर सकती हैं।
सावन सोमवार पर बाल न धोने की क्या है परंपरा? जानिए इसके पीछे का धार्मिक महत्व और कारण
सावन के पवित्र सोमवार पर बहुत से शिव भक्त बाल धोने से परहेज करते हैं, जिसके पीछे खास धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
पूजा के समय दीपक का बुझना क्या किसी अनहोनी का संकेत है? जानें इसके पीछे के धार्मिक और व्यावहारिक कारण
पूजा-पाठ के दौरान जलते हुए दीपक का अचानक बुझ जाना कई लोगों के मन में डर पैदा कर देता है। आइए जानते हैं कि शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार इसका क्या अर्थ होता है और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।
आशा दशमी 2026: व्रत की शुभ तिथि, पूजा करने का सही तरीका और नियमों की पूरी जानकारी
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आशा दशमी के रूप में मनाया जाता है, जिसमें दस दिशाओं की देवियों की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुखद दांपत्य जीवन और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखती हैं।
सावन में जलाभिषेक के बाद बचे हुए पवित्र जल का क्या करें, 99 प्रतिशत लोग अनजाने में कर देते हैं ये बड़ी गलती
सावन के महीने में शिव पूजन के दौरान शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद बचे हुए पवित्र जल को लेकर लोग अक्सर भ्रमित रहते हैं और उसे गलत जगह फेंक देते हैं। ज्योतिषी से जानिए इस जल के विसर्जन का सही तरीका और वास्तु के अनुसार इसके महत्व के बारे में।
क्या मंदिर दर्शन के लिए खाली पेट जाना है जरूरी? जानें धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी अहम जानकारी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर जाने का सही समय और नियम क्या होने चाहिए, इसे लेकर अक्सर लोगों के मन में भ्रम रहता है। आइए जानते हैं कि शास्त्र और ज्योतिष के नजरिए से भोजन और मंदिर दर्शन का क्या संबंध है।
मंदिर में घंटी बजाने का क्या है धार्मिक महत्व और सही नियम, जानें यहाँ
हिंदू धर्म में मंदिरों में घंटी बजाने की परंपरा बहुत पुरानी है, जो केवल एक रस्म नहीं बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
निर्जला एकादशी पर बरसेगी लक्ष्मी-नारायण की कृपा, इस बार फरीदाबाद के लिए खास है यह व्रत
25 जून 2026 को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी इस बार गुरुवार को पड़ रही है, जो विशेष रूप से सुख-समृद्धि और विवाह बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है।