उपनाम: लोकगीत
छठ महापर्व में साक्षात सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व, लोकगायिका अर्पिता चौधरी ने बताई पर्व की महिमा और लोकगीतों की परंपरा
बिहार के सबसे बड़े लोकपर्व छठ की शुरुआत के साथ ही चारों तरफ भक्ति का माहौल है। भागलपुर की लोकगायिका अर्पिता चौधरी ने बताया कि बिना लोकगीतों के यह चार दिवसीय अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
सोहर क्या है और बेटियों के जन्म पर गीत गाने से जुड़ी सामाजिक परंपराएं क्या कहती हैं?
भारत की लोक संस्कृति में सोहर एक विशेष गीत परंपरा है जो बच्चों के जन्म पर गाई जाती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कुछ पुरानी सामाजिक धारणाएं और भेदभाव के पहलू भी चर्चा का विषय रहे हैं।
लोकगीत के पीछे छिपा राजपूताना का अद्भुत इतिहास: जानिए 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' का मतलब
राजस्थान का चर्चित लोकगीत 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' महज मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मारवाड़ की एक चतुर युद्धनीति को दर्शाता है।
आगे-आगे कोतल घोड़लो: 600 घोड़ों के सौदे और युद्ध की अनोखी कहानी में छिपी है ऐतिहासिक कूटनीति
राजस्थान का प्रसिद्ध लोकगीत 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' महज एक गीत नहीं, बल्कि महाराजा अभय सिंह की उस चतुर युद्धनीति का प्रतीक है, जिसने ढोल की थाप से जयपुर की सेना को मात दी थी।