उपनाम: भारतीय संस्कृति
इंडोनेशिया दौरे पर भारतीय संस्कृति का जादू: पीएम मोदी के सामने मंच पर जीवंत हुई रामायण और भरतनाट्यम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता में भारतीय समुदाय के उत्साहपूर्ण स्वागत और वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखकर अभिभूत नजर आए।
बीकानेर का अनूठा इतिहास: जहाँ राजा नहीं, भगवान लक्ष्मीनाथ को माना जाता था राज्य का वास्तविक शासक
बीकानेर रियासत की एक गौरवशाली परंपरा रही है, जिसमें यहां के राठौड़ शासकों ने स्वयं को राजा मानने के बजाय भगवान लक्ष्मीनाथ का सेवक माना। राज्य की सत्ता का वास्तविक स्वामी भगवान लक्ष्मीनाथ को ही माना जाता था और इसी मान्यता के साथ यहां शासन का संचालन किया जा...
राजस्थान के कलाकार अजय रावत ने सेशेल्स में बिखेरा अपनी कला का जादू, सैंड आर्ट से बढ़ाया भारत का मान
पुष्कर के रहने वाले सैंड आर्टिस्ट अजय रावत ने सेशेल्स में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में रेत पर उकेरी अद्भुत कलाकृतियों से वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
जालोर की रहस्यमयी सांड बावड़ी: वह प्राचीन धरोहर जहां जल से बदली जाती थी लोगों की किस्मत
राजस्थान के जालोर जिले में स्थित सांड बावड़ी न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां का जल प्राचीन काल में भाग्य बदलने वाला माना जाता था। स्थानीय मान्यताएं इसे साहस, सत्य और सफलता से जोड़कर देखती हैं।
FIFA World Cup के दौरान छाए विदेशी फुटबॉलर, पीठ पर गुदवाया भगवान शिव का टैटू, भारत के प्रति जताई विशेष आस्था
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के माहौल के बीच स्लोवेनिया के फुटबॉलर लुका मेजसेन का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी पीठ पर भगवान शिव का टैटू और महामृत्युंजय मंत्र बनवाया है।
काशी के 4 अद्भुत और रहस्यमयी रिवाज: जलती चिताओं पर नृत्य से लेकर उबलती खीर से स्नान तक
धर्म की नगरी काशी अपनी अनोखी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहाँ की कुछ रस्में इतनी रहस्यमयी हैं कि उन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।
यूरोपीय महिला ने अपनाए भारतीय पेरेंटिंग के 4 खास तरीके, बच्चों की परवरिश को लेकर बदला नजरिया
यूरोप की रहने वाली केन्सिया कला ने भारतीय पेरेंटिंग शैली से प्रभावित होकर चार प्रमुख परंपराओं को अपनाया है, जिससे उनके बच्चों के साथ संबंध और गहरे हुए हैं।
राजस्थान का नारलाई गांव: 350 मंदिरों वाली रहस्यमयी देव नगरी का अद्भुत इतिहास
राजस्थान के पाली जिले में स्थित नारलाई गांव अपनी 350 से अधिक मंदिरों की अद्भुत श्रृंखला के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस गांव को नारद मुनि की तपोस्थली माना जाता है, जिसे देव नगरी के नाम से भी पुकारा जाता है।
घर से निकलते समय दही-शक्कर खिलाने के पीछे छिपे हैं बड़े वैज्ञानिक और धार्मिक कारण
भारतीय घरों में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए घर से बाहर जाने से पहले दही-शक्कर खिलाने की पुरानी परंपरा है, जिसके पीछे स्वास्थ्य और सकारात्मक मनोविज्ञान जैसे ठोस कारण हैं।
किसी भी महत्वपूर्ण काम से पहले क्यों खिलाते हैं दही-शक्कर? जानें इस पुरानी परंपरा का खास महत्व
भारतीय घरों में किसी भी शुभ कार्य या परीक्षा से पहले दही-शक्कर खिलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह रिवाज न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य और मनोविज्ञान से जुड़े कई कारण भी छिपा हैं।
कोटा की लाख चूड़ियां: 55 डिग्री गर्मी की तपिश में भी निखरता है कारीगरों का हुनर
राजस्थान के कोटा में बनी लाख की रंग-बिरंगी चूड़ियां आज भी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। 55 डिग्री तक की भीषण गर्मी में भी कारीगर इन्हें पारंपरिक तरीके से हाथों से बनाते हैं, जो उनकी मेहनत और कला का अद्भुत प्रदर्शन है।
शास्त्र और परंपराएं: पिता के जीवित रहते बेटों को टालने चाहिए ये चार काम, जानिए इसके पीछे की मान्यता
भारतीय संस्कृति में पिता को परिवार का संरक्षक और मार्गदर्शक माना गया है। परंपराओं के अनुसार पिता के जीवित रहते बेटों को कुछ खास कार्यों से बचना चाहिए, जो सम्मान और संस्कार का प्रतीक हैं।
मालपुए: सिर्फ मिठास नहीं, रिश्तों की डोर का प्रतीक; 33 मालपुओं के दान की निराली परंपरा
अधिक मास के दौरान बीकानेर में 33 मालपुओं के दान की मान्यता निभाई जाती है, जिसके चलते लोग बहन-बेटियों के घर मालपुए भेजकर रिश्तों की मिठास और अपनापन बढ़ाते हैं।
गर्मी की छुट्टियों में 'देवभाषा' का पाठ: महिषी में बच्चों को संस्कृत, संस्कार और संस्कृति से जोड़ने की प्रेरक मुहिम शुरू
सहरसा के महिषी स्थित उग्रतारा वेद विद्या केंद्र में ग्रीष्मकालीन संस्कृत शिक्षा जागृति कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें बच्चों और युवाओं को संस्कृत भाषा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जा रहा है।
उज्जैन बनेगा सांस्कृतिक नेतृत्व का केंद्र, प्रथम सिंधु कुंभ में जुटेंगे करीब 20 देश
17 से 30 जून 2026 तक लेह-लद्दाख में सिंधु नदी के तट पर प्रथम सिंधु कुंभ का भव्य आयोजन होगा, जिसमें उज्जैन समन्वय और नेतृत्व का प्रमुख केंद्र बनेगा।