मशरूम खेती से बदली किरण देवी की किस्मत, 5 लाख के लोन से खड़ा किया आत्मनिर्भरता का बड़ा कारोबार बिहार एक घंटा पहले 4
सीतामढ़ी की किरण कुमारी ने वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन कर सफलता की नई कहानी लिखी है। प्रशिक्षण और बैंक ऋण की मदद से उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी हैं।

मशरूम की खेती से बदली तस्वीर

सीतामढ़ी जिले के बोखरा प्रखंड स्थित कुरहर गांव की रहने वाली किरण कुमारी ने आज आत्मनिर्भरता की एक ऐसी मिसाल कायम की है जो ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर उन्होंने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी मेहनत के दम पर सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकता है।

प्रशिक्षण से मिली नई दिशा

किरण कुमारी के इस सफल सफर की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र, पुपरी से हुई। वर्ष 2022 में उन्होंने यहां मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण लिया, जो करीब 39 दिनों तक चला। इस दौरान उन्होंने मशरूम की वैज्ञानिक खेती के हर पहलू को गहराई से समझा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपने घर पर ही सीमित संसाधनों के साथ मशरूम की खेती की शुरुआत की। उन्होंने यह साबित कर दिया कि खेती केवल जमीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक के इस्तेमाल से इसे एक व्यवसाय के रूप में भी अपनाया जा सकता है।

बैंक ऋण और व्यावसायिक विस्तार

काम को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए पूंजी की आवश्यकता थी। इस चुनौती को देखते हुए किरण कुमारी ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की बनौल शाखा से संपर्क किया। बैंक ने उनकी योजना पर भरोसा जताते हुए उन्हें 5 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया। इस आर्थिक मदद ने उनके काम को नई रफ्तार दी। उन्होंने सबसे पहले उच्च गुणवत्ता वाला कंपोस्ट तैयार किया। इसके लिए उन्होंने भूसे और अन्य जरूरी सामग्रियों का सही मिश्रण तैयार किया, जिससे मशरूम की पैदावार शानदार रही। बैग में बीज लगाने के बाद कुछ ही समय में मशरूम की फसल तैयार हो गई।

उत्पादन और बाजार की मांग

किरण कुमारी की कड़ी मेहनत का असर अब उनके उत्पादन में भी दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, उनके द्वारा तैयार किए गए हर बैग से लगभग 2 से ढाई किलो तक मशरूम प्राप्त होता है। वह करीब 5 क्विंटल भूसे का इस्तेमाल करके लगभग साढ़े 3 क्विंटल मशरूम का उत्पादन करने में सक्षम हैं। उनके द्वारा उगाए गए मशरूम की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि स्थानीय बाजारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। वह बनौल, भावौर, पुपरी, जाले, महुआगाछी और रायपुर जैसे नजदीकी बाजारों में अपना माल भेजती हैं, जहां ग्राहक इसे हाथों-हाथ खरीद लेते हैं।

आर्थिक मजबूती और परिवार का सहयोग

मशरूम उत्पादन से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। वह समय पर बैंक लोन की किस्तें चुका रही हैं और बच्चों की शिक्षा पर भी बेहतर खर्च कर पा रही हैं। इस काम में उनके पति बैद्यनाथ यादव का भी पूरा साथ मिलता है, जो डेयरी व्यवसाय को संभालते हैं। इसके अलावा किरण स्वयं भी जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं और अन्य सामुदायिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं। सरकारी योजनाओं और बैंक के सहयोग से यह परिवार आज आत्मनिर्भरता का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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