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एक घंटा पहले
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रविवार को बैंकिंग कामकाज पर छाया संकट
क्या 27 सितंबर, रविवार के दिन बैंक अपनी शाखाएं खोलेंगे या वे बंद रहेंगे, इस सवाल ने देश भर के बैंक ग्राहकों के मन में एक बड़ी उलझन पैदा कर दी है। एक तरफ केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे रविवार को अपनी शाखाएं संचालित रखें। वहीं दूसरी ओर, बैंक अधिकारियों के एक प्रमुख संगठन ने अपने सदस्यों से आह्वान किया है कि वे इस दिन ड्यूटी पर न आएं। ऐसी स्थिति में, बैंक की शाखाओं में आम जनता के लिए बैंकिंग सेवाएं कितनी प्रभावी रहेंगी, यह पूरी तरह से उस दिन दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारियों की संख्या पर निर्भर करेगा।
क्यों लिया गया बैंक खोलने का फैसला?
बैंकों को खोलने का यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा 21 सितंबर को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारतीय बैंक संघ, नाबार्ड, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रतिनिधि शामिल थे। सरकार का यह कदम 28 से 30 सितंबर तक होने वाली तीन दिनों की प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए उठाया गया है। चूंकि 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत के कारण वैसे ही छुट्टियां पड़ रही थीं, इसलिए यदि रविवार को भी बैंक बंद रहते तो ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहना पड़ता। आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रविवार को कामकाज जारी रखने का फैसला लिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक और यूनियन का पक्ष
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी 27 सितंबर को बैंक शाखाओं के अतिरिक्त बैंक कार्यालयों, करेंसी चेस्ट और एटीएम से जुड़ी इकाइयों को काम करने की मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य हड़ताल के दौरान आने वाली बाधाओं से पहले लंबित और जरूरी कामकाज को निपटाना है। हालांकि, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस निर्देश पर असहमति जताई है। संगठन का तर्क है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत रविवार यानी 27 सितंबर को एक अवकाश का दिन माना जाता है, इसलिए उन्होंने अपने सदस्यों से कार्यालय न जाने का अनुरोध किया है।
28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल की वजह
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और अन्य संबंधित संगठनों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यह इस महीने की 11 तारीख को हुई एक दिवसीय हड़ताल के बाद अगला बड़ा विरोध प्रदर्शन है। बैंक यूनियनों की मुख्य मांगों में बैंकिंग सप्ताह को पांच दिन का करने, पेंशन में सुधार करने, और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते व पेंशन योजनाओं में उचित बदलाव लागू करने जैसी मांगें प्रमुखता से शामिल हैं।
ग्राहकों के लिए सुझाव
रविवार को शाखाओं में सेवाओं की उपलब्धता पूरी तरह से कर्मचारियों की उपस्थिति पर टिकी है। जिन ग्राहकों के पास शाखा संबंधी कोई अनिवार्य काम है, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपना कार्य यथासंभव समय रहते ही पूर्ण कर लें। राहत की बात यह है कि एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, किसी विशेष बैंक की सेवा में कोई रुकावट आएगी या नहीं, यह उस बैंक के आंतरिक प्रबंधन और परिचालन संबंधी इंतजामों पर ही निर्भर करेगा।
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