कोयल मल्लिक का बड़ा राजनीतिक दांव, एक साल में दूसरी बार राज्यसभा जाने की तैयारी राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 7
बंगाली फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। बीजेपी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनीं कोयल मल्लिक

बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें कोयल मल्लिक के नाम से पूरी दुनिया जानती है, इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से अपना इस्तीफा देने के बाद कोयल मल्लिक ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। बीजेपी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। दिलचस्प बात यह है कि कोयल मल्लिक महज एक साल के भीतर दूसरी बार राज्यसभा में कदम रखने की तैयारी कर रही हैं, जो भारतीय राजनीति में अपने आप में एक अनोखी घटना है।

राज्यसभा का सफर और संक्षिप्त कार्यकाल

कोयल मल्लिक के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो फरवरी 2026 में ममता बनर्जी ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा के लिए नामित किया था। 5 मार्च 2026 को उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, जिसमें उनके साथ सुप्रीम कोर्ट की वकील मेनका गुरुस्वामी और पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार भी शामिल थे। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 को कोयल ने राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली। हालांकि, उनका यह संसदीय कार्यकाल बेहद छोटा साबित हुआ। मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही उन्होंने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। गौर करने वाली बात यह है कि टीएमसी सांसद रहते हुए उन्होंने संसद के किसी भी सत्र में भाग नहीं लिया था।

इस्तीफे के पीछे का राजनीतिक घटनाक्रम

पश्चिम बंगाल की विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में तेजी से बदलाव आया। ममता बनर्जी की हार के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए और टीएमसी में नेताओं के दल बदलने का सिलसिला शुरू हो गया। इसी दौर में कोयल मल्लिक ने भी पार्टी से किनारा करना शुरू कर दिया था। राज्यसभा के सभापति को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी। जानकारों का मानना है कि राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के आंतरिक हालातों के चलते उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया। अब बीजेपी के टिकट पर उनका नाम सामने आने से टीएमसी को एक बड़ा प्रतीकात्मक झटका लगा है।

फिल्मी विरासत और कोयल मल्लिक की पहचान

कोयल मल्लिक का नाम बंगाली मनोरंजन जगत में किसी पहचान का मोहताज नहीं है। उनका असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है और उन्हें प्यार से प्रशंसक टॉलीवुड की 'टॉली-क्वीन' बुलाते हैं। कोयल को अभिनय की कला विरासत में मिली है। उनके पिता रंजीत मल्लिक बंगाली सिनेमा के एक अत्यंत सम्मानित और दिग्गज अभिनेता रहे हैं। रंजीत मल्लिक के दशकों लंबे फिल्मी करियर और उनकी भारी फैन फॉलोइंग ने कोयल को इंडस्ट्री में स्थापित होने में मदद की। हालांकि, कोयल ने अपनी प्रतिभा के बल पर खुद को एक अलग मुकाम पर पहुंचाया और बंगाली दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई।

सक्रिय राजनीति में एंट्री की रणनीति

कोयल मल्लिक ने सक्रिय राजनीति में बहुत हाल ही में कदम रखा था। राज्यसभा के लिए अपने पहले नामांकन से लगभग एक महीना पहले ही वह राजनीतिक रूप से सक्रिय हुई थीं। ममता बनर्जी की रणनीति स्पष्ट थी कि वे फिल्म और खेल जगत के लोकप्रिय चेहरों को संसद में लाकर अपनी पार्टी का प्रभाव बढ़ाना चाहती थीं। कोयल मल्लिक को राज्यसभा भेजना इसी रणनीति का हिस्सा था। लेकिन राजनीति का खेल इतना अनिश्चित होता है कि जो चेहरा कल तक ममता की पार्टी की पहचान था, आज वही बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर उच्च सदन में बैठने के लिए तैयार है।

सोशल मीडिया पर प्रभाव और बीजेपी की रणनीति

कोयल मल्लिक की लोकप्रियता सिर्फ बड़े पर्दे तक ही सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त पकड़ है। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनके 30 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जहाँ वह नियमित रूप से अपनी तस्वीरें और फिल्मी प्रोजेक्ट्स की जानकारी साझा करती हैं। बीजेपी के लिए कोयल मल्लिक केवल एक उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि वे युवा मतदाताओं और बंगाली समाज के बड़े वर्ग को जोड़ने का एक माध्यम भी हैं।

बीजेपी के लिए राज्यसभा उम्मीदवार का महत्व

कोयल मल्लिक को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने अपनी दोहरी रणनीति को साफ कर दिया है। पहला, वह बंगाली सिनेमा का सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं, जिससे पार्टी की छवि को एक नया आधार मिलेगा। दूसरा, कुछ महीने पहले तक टीएमसी की सांसद रही कोयल का बीजेपी में आना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। बीजेपी इस कदम के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल में अब केवल अपने पारंपरिक सांगठनिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लैमर और लोकप्रियता को भी राजनीति में समाहित करने में सक्षम है।

एक साल का अनूठा राजनीतिक घटनाक्रम

अगर कोयल मल्लिक के पिछले छह महीनों के राजनीतिक सफर को देखा जाए तो यह बेहद नाटकीय है:

  • फरवरी 2026: ममता बनर्जी द्वारा टीएमसी से राज्यसभा के लिए नामित।
  • 5 मार्च 2026: राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया।
  • 6 अप्रैल 2026: टीएमसी सांसद के तौर पर पहली बार राज्यसभा की शपथ ली।
  • जुलाई 2026: राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
  • 4 अक्टूबर 2026: भारतीय जनता पार्टी द्वारा पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित।

इस तरह एक ही साल में कोयल मल्लिक का राजनीतिक सफर एक पार्टी से दूसरी पार्टी और एक सांसद की कुर्सी से दोबारा नामांकन तक पहुंच चुका है, जो बंगाल की आगामी राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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