3 नवंबर का मौसम पूर्वानुमान: चक्रवाती तूफान मुरासु का भारी कहर, किन राज्यों में अलर्ट जारी? राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 3 नवंबर के लिए दक्षिण भारत में चक्रवाती तूफान मुरासु के कारण भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि उत्तर भारत में गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है।

दक्षिण भारत में मुरासु का तांडव

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD द्वारा 3 नवंबर के लिए जारी किए गए नवीनतम मौसम बुलेटिन में देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए स्पष्ट चेतावनी दी गई है। दक्षिण भारत के राज्यों में भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ चुका है। इस चक्रवात के प्रभाव से कई राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर, देश के बाकी हिस्सों जैसे उत्तर और पश्चिम भारत में मौसम शुष्क बना हुआ है और तापमान में गिरावट के साथ गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है।

दक्षिण भारत के लिए गंभीर चेतावनी

आज दक्षिण भारत के कई राज्यों में मौसम की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और रायलसीमा क्षेत्र के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है। यहाँ हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। कुछ चुनिंदा इलाकों में Extremely Heavy Rainfall यानी अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

तेलंगाना के कई जिलों, विशेषकर खम्मम, नलगोंडा, वारंगल और सूर्यपेट में स्थिति चिंताजनक है। यहाँ भारी बारिश के साथ 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। इसके अतिरिक्त उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल के कुछ हिस्सों में भी गरज और चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की कड़ी चेतावनी दी गई है।

उत्तर भारत में गुलाबी ठंड का असर

दक्षिण भारत के विपरीत, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क बना हुआ है। दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में मौसम की परिस्थितियाँ स्थिर हैं। हालांकि, सुबह और देर रात के समय हल्की धुंध यानी मिस्ट का अनुभव हो रहा है, जो ठंड के आगमन का संकेत है। धीरे-धीरे तापमान में गिरावट आ रही है, जिससे गुलाबी ठंड का एहसास तेज हो गया है।

वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का प्रकोप स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। हालांकि, मैदानी घाटियों में धूप खिली रहने की संभावना है जिससे दिन का समय अभी भी सामान्य बना हुआ है।

पूर्वी भारत में बादलों की सक्रियता

बंगाल की खाड़ी में बने मौसम प्रणालियों के कारण पूर्वी भारत के तटीय और मध्यवर्ती हिस्सों में बादलों की आवाजाही में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ओडिशा के दक्षिणी तटीय जिलों में हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटे रहने की उम्मीद है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां शुरू होने के आसार हैं। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में मौसम आमतौर पर सूखा रहने का अनुमान है, हालांकि आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं।

पश्चिम भारत और महाराष्ट्र का हाल

गुजरात और राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में मौसम पूरी तरह शुष्क है। यहाँ दिन में हल्की गर्माहट महसूस की जा सकती है, लेकिन रात होते ही तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। महाराष्ट्र के विदर्भ और दक्षिणी मराठवाड़ा क्षेत्र में दक्षिण भारत के सिस्टम के प्रभाव के कारण बादलों की आवाजाही बनी हुई है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। वहीं, कोंकण और मुंबई के आसपास का मौसम साफ, लेकिन उमस भरा बना रहने की उम्मीद है।

चक्रवाती तूफान मुरासु का ताजा अपडेट

मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के पास बंगाल की खाड़ी के पश्चिमी-मध्य हिस्से में सक्रिय भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु पिछले 6 घंटों के दौरान लगभग 8 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। यह तूफान ओंगोल और नेल्लोर के बीच आंध्र तट को पार कर चुका है। लैंडफॉल के दौरान 100 से 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलीं, जो झोंकों में 120 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गईं।

IMD के मुताबिक, यह सिस्टम जमीन पर आगे बढ़ते हुए दोपहर तक कमजोर होकर एक चक्रवाती तूफान (80-90 किमी प्रति घंटा) में तब्दील हो जाएगा। आज 3 नवंबर की आधी रात तक इसके और कमजोर पड़कर Deep Depression (55-65 किमी प्रति घंटा) में बदल जाने की संभावना है। इस चक्रवात के प्रभाव से तटीय आंध्र और तेलंगाना के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। प्रशासन ने कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को होने वाले नुकसान के प्रति सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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