जॉम्बी बना देती है यह रहस्यमयी फंगस: शिकार के शरीर से झड़ जाते हैं अंग और खोपड़ी फाड़कर बाहर आती है यह बला विश्व 46 मिनट पहले 2
प्रकृति की दुनिया में एक ऐसी फंगस मौजूद है जो चींटियों को जिंदा जॉम्बी में बदल देती है। ओफियोकोर्डिसेप्स यूनिलैटरलिस नाम की यह फंगस शिकार के नर्वस सिस्टम को नियंत्रित कर उसे मौत के मुंह में धकेलती है।

विज्ञान की दुनिया का एक भयावह सच

हॉलीवुड की फिल्मों में जॉम्बी इन्फेक्शन और किसी वायरस के कारण इंसानों के नियंत्रण खोने की कहानियां देखना दर्शकों को रोमांच से भर देता है, लेकिन प्रकृति के घने जंगलों में वास्तव में ऐसी घटनाएं घटती हैं जो किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी फंगस की खोज की है जो चींटियों को अपना शिकार बनाकर उन्हें जॉम्बी की तरह इस्तेमाल करती है। इस फंगस का वैज्ञानिक नाम ओफियोकोर्डिसेप्स यूनिलैटरलिस है। इसका मुख्य उद्देश्य अपने वंश को आगे बढ़ाना और अपने बीजाणुओं यानी स्पोर्स को दूर-दूर तक फैलाना होता है। इस प्रक्रिया में यह चींटियों के शरीर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लेती है।

संक्रमण की शुरुआत और डेथ ग्रिप

यह खतरनाक फंगस मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जंगलों यानी ट्रॉपिकल जंगलों में पाई जाती है। संक्रमण की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब हवा में तैरते हुए इस फंगस के बीजाणु किसी गुजरती हुई चींटी के शरीर के बाहरी सख्त कवच से चिपक जाते हैं। एक बार शरीर पर कब्जा करने के बाद, यह फंगस अंदर ही अंदर चींटी को संक्रमित करना शुरू कर देती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, फंगस चींटी के व्यवहार को बदलने लगती है। वह उसे उसका घर छोड़ने और किसी पौधे की पत्ती पर चढ़ने के लिए मजबूर कर देती है। चींटी जमीन से करीब 10 इंच की ऊंचाई पर जाकर पत्ती की मुख्य नस को अपने जबड़ों से बहुत मजबूती से जकड़ लेती है। वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को डेथ ग्रिप का नाम दिया है।

दिमाग नहीं, नर्वस सिस्टम पर होता है हमला

आम तौर पर लोगों को लगता है कि यह फंगस चींटी के दिमाग को नियंत्रित करती होगी, लेकिन रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह फंगस सीधे चींटी के मस्तिष्क में प्रवेश नहीं करती। इसके बजाय, यह चींटी की मांसपेशियों के चारों ओर अपना एक जाल बुनती है और सीधे उसके नर्वस सिस्टम को अपने नियंत्रण में ले लेती है। इसी कारण चींटी खुद को चाहकर भी नहीं बचा पाती और फंगस के इशारों पर कठपुतली की तरह काम करने लगती है।

खोपड़ी फाड़कर निकलता है नया जीवन

जब चींटी डेथ ग्रिप में अपनी आखिरी सांस लेती है, उसके कुछ ही दिनों बाद फंगस का अगला चरण शुरू होता है। यह फंगस चींटी की खोपड़ी के पिछले हिस्से को फाड़कर बाहर निकल आती है। मृत चींटी अब केवल एक शव नहीं, बल्कि फंगस के लिए एक लॉन्चपैड का काम करती है। इसी जगह से फंगस अपने स्पोर्स को हवा में छोड़ती है, जो पास से गुजरने वाली दूसरी चींटियों को संक्रमित करने के लिए तैयार रहते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र और विविधता

हालांकि यह संक्रमण 100% घातक है, लेकिन प्रकृति इसे एक संतुलन के रूप में देखती है। यह फंगस पूरी की पूरी चींटी कॉलोनी को खत्म नहीं करती, बल्कि चुनिंदा चींटियों को ही अपना शिकार बनाती है। विशेषज्ञ इसे एक प्रकार के क्रॉनिक कोल्ड जैसा मानते हैं जो जंगलों के इकोसिस्टम को संतुलित रखने में भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इस फंगस की अब तक 200 से भी अधिक प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं। ये अलग-अलग तरह के कीड़ों और मकड़ियों पर असर डालती हैं। कुछ मामलों में तो यह फंगस शिकार को इतने खतरनाक ड्रग्स के प्रभाव में ला देती है कि उनके शरीर के अंग तक गलकर झड़ने लगते हैं, जो इसे प्रकृति की सबसे डरावनी प्रजातियों में से एक बनाता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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