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3 महीने पहले
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इतिहास के पन्नों में दर्ज एक अनोखा मामला
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा नेता हो, जिसे गुजरे हुए एक सदी से अधिक का समय हो गया हो और उसका अंतिम संस्कार अब तक न किया गया हो। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के कुछ घंटों या अधिकतम कुछ दिनों के भीतर उसे सुपुर्द-ए-खाक या दाह संस्कार कर दिया जाता है। लेकिन रूस के क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन का पार्थिव शरीर 1924 से मॉस्को के रेड स्क्वायर स्थित लेनिन म्यूजोलियम में आज भी सुरक्षित रखा गया है। यह न केवल एक ऐतिहासिक तथ्य है, बल्कि विज्ञान और तकनीक का एक ऐसा चमत्कार भी है जो 102 वर्षों बाद भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालिया घटनाक्रम और परंपराएं
हाल के दिनों में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के निधन के बाद अंतिम संस्कार में हुई देरी ने एक बार फिर इस बहस को जीवित कर दिया है। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में उनकी मृत्यु हुई थी। उस समय देश युद्ध की विभीषिका से गुजर रहा था, जिसके कारण तुरंत अंतिम संस्कार संभव नहीं हो सका। हालांकि, अब हालात सामान्य होने पर 116 दिन बाद, यानी 9 जुलाई को उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। इन 116 दिनों के दौरान उनके पार्थिव शरीर को एक गुप्त और सुरक्षित स्थान पर रखा गया था। लेकिन व्लादिमीर लेनिन का मामला इससे कहीं अधिक लंबा और सार्वजनिक है।
व्लादिमीर लेनिन और सोवियत संघ की नींव
व्लादिमीर इलिच लेनिन का जन्म 22 अप्रैल 1870 को रूस में हुआ था। उन्होंने 1917 की बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व करते हुए रूस के सदियों पुराने राजतंत्र को समाप्त कर दिया। इसी क्रांति के परिणामस्वरूप दुनिया के पहले कम्युनिस्ट देश, सोवियत संघ (USSR) का उदय हुआ। लेनिन न केवल सोवियत संघ के पहले प्रमुख थे, बल्कि उन्होंने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित की, जिसे बाद में दुनिया के कई देशों ने अपनाया। 21 जनवरी 1924 को मात्र 53 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, जिसने पूरे देश को शोक में डूबा दिया था।
अंतिम संस्कार न करने का निर्णय
लेनिन की मृत्यु के बाद सरकार ने उनके अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी कर ली थी। हालांकि, लाखों की संख्या में आम नागरिक और उनके समर्थक उन्हें अंतिम बार देखने के लिए उमड़ पड़े। चूँकि उस समय कड़ाके की ठंड का मौसम था, इसलिए उनका पार्थिव शरीर कई दिनों तक बिना किसी विशेष व्यवस्था के भी सुरक्षित रहा। इस दौरान लोगों की बढ़ती भीड़ और उनके प्रति जनता के प्रेम को देखते हुए सोवियत नेतृत्व ने उन्हें दफनाने के बजाय हमेशा के लिए संरक्षित रखने का साहसी निर्णय लिया। पहले उन्हें लकड़ी के एक अस्थायी स्मारक में रखा गया और बाद में रेड स्क्वायर पर भव्य लेनिन म्यूजोलियम का निर्माण किया गया, जहां वे आज भी मौजूद हैं।
कैसे सुरक्षित रखा गया 102 साल पुराना शरीर
यह प्रश्न विज्ञान जगत और आम लोगों के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है कि एक मानव शरीर बिना सड़े-गले एक सदी से अधिक समय तक कैसे बना रह सकता है? इसका उत्तर केवल सामान्य संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सोवियत वैज्ञानिकों ने एक अत्यंत जटिल और आधुनिक तकनीक विकसित की थी। लेनिन के शरीर से सारा रक्त और अन्य तरल पदार्थ निकाल दिए गए थे, जिसके बाद उन्हें एक विशेष रासायनिक घोल से उपचारित किया गया ताकि शरीर के ऊतक (टिशू) नष्ट न हों।
विशेषज्ञों की एक टीम आज भी इस प्रक्रिया को निरंतर संचालित कर रही है। हर 18 महीने में उनके शरीर को विशेष रसायनों के घोल में कई हफ्तों तक डुबोकर रखा जाता है। यह प्रक्रिया शरीर की त्वचा की नमी और लचीलेपन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। जिस ताबूत में उन्हें रखा गया है, वहां का तापमान और आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) भी आधुनिक तकनीक से नियंत्रित की जाती है। वातावरण में कोई भी मामूली बदलाव शरीर को नुकसान पहुँचा सकता है, इसलिए वहां 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है।
क्या शरीर का हर हिस्सा असली है
लगातार हो रही देखरेख के दौरान समय-समय पर लेनिन के शरीर के कुछ हिस्सों की मरम्मत भी की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, आज जो पार्थिव शरीर दिखाई देता है, उसमें अधिकांश हिस्सा तो मूल शरीर का ही है, लेकिन दशकों की लंबी अवधि के दौरान कुछ बाहरी ऊतकों और अंगों को वैज्ञानिक विधियों से पुनर्निर्मित या संरक्षित किया गया है। इसलिए, आज का स्वरूप 1924 के मूल स्वरूप से थोड़ा अलग हो सकता है, परंतु इसे अभी भी लेनिन का वास्तविक शरीर ही माना जाता है।
भविष्य को लेकर जारी बहस
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, रूस में कई राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने मांग उठाई कि अब लेनिन का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर देना चाहिए। मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासनकाल में भी यह मुद्दा कई बार चर्चा में आया है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। वर्तमान में, मॉस्को का रेड स्क्वायर और वहां स्थित लेनिन म्यूजोलियम पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। दुनिया भर से आने वाले इतिहास प्रेमी और पर्यटक इस अद्भुत स्मारक को देखने के लिए पहुंचते हैं, जो अपने आप में एक जीवंत इतिहास की तरह है।
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