चुनावी प्रचार में बच्चों की भागीदारी: DMK की याचिका के खिलाफ CM विजय का मद्रास हाईकोर्ट में बड़ा पलटवार राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने अपनी चुनावी जीत को चुनौती देने वाली DMK उम्मीदवार की याचिका को खारिज करने की मांग की है, जिसमें प्रचार में बच्चों के कथित उपयोग का मुद्दा उठाया गया था।

मद्रास हाईकोर्ट में सीएम विजय ने दाखिल की याचिका

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने अपनी चुनावी जीत को चुनौती देने वाली DMK उम्मीदवार की चुनाव याचिका को खारिज करने के लिए मद्रास हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर किया है। विजय की कानूनी टीम ने कोर्ट से मांग की है कि इस याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाए क्योंकि इसमें कानूनी आधार का अभाव है। यह मामला मुख्य रूप से चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों की कथित भागीदारी से जुड़ा हुआ है।

कानूनी लड़ाई और मुख्य तर्क

इस विवाद की शुरुआत DMK उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज द्वारा दायर की गई चुनाव याचिका से हुई, जिसमें उन्होंने विजय की जीत को कानूनी रूप से चुनौती दी है। अपनी याचिका में इरुदयराज ने चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल करने समेत कई अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। जवाब में, मुख्यमंत्री विजय ने हाईकोर्ट के समक्ष रिजेक्ट द प्लेंट आवेदन दाखिल किया है। विजय के वकीलों का तर्क है कि चुनाव प्रचार में बच्चों की उपस्थिति का आरोप अपने आप में इतना गंभीर नहीं है कि इसके आधार पर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की जीत को रद्द किया जा सके।

न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान, मुख्यमंत्री की ओर से Representation of the People Act, 1951 यानी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 100 का हवाला दिया गया। वकीलों ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहे हैं कि बच्चों की भागीदारी ने चुनाव परिणाम को किस प्रकार प्रभावित किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव रद्द करने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि कथित अनियमितताओं का चुनाव के नतीजों पर वास्तविक और ठोस असर पड़ा है, जो कि वर्तमान याचिका में स्पष्ट नहीं है।

प्रचार में बच्चों के उपयोग पर विवाद की हकीकत

DMK उम्मीदवार द्वारा लगाए गए आरोपों में मुख्य मुद्दा बच्चों का राजनीतिक प्रचार में उपयोग है। हालांकि, विजय की टीम का रुख साफ है कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों या आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगना एक बात है और उस आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया को अवैध घोषित करना दूसरी बात। मुख्यमंत्री की कानूनी टीम ने अदालत को बताया कि याचिका में ऐसे कोई साक्ष्य नहीं पेश किए गए हैं जिनसे यह साबित हो सके कि बच्चों की उपस्थिति ने मतदाताओं के मन में कोई भावनात्मक प्रभाव पैदा किया या चुनावी परिणाम की दिशा बदल दी।

विजय के पक्ष ने तर्क दिया कि केवल सामान्य आरोपों या अनुमानों के आधार पर चुनाव परिणामों को चुनौती नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता को ठोस सामग्री और प्रभाव से जुड़े स्पष्ट सबूत देने की जरूरत है, जिसका इस मामले में पूर्ण अभाव है।

खर्च की सीमा और अन्य आरोपों का खंडन

प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल के अलावा, DMK उम्मीदवार ने विजय पर तय सीमा से अधिक चुनावी खर्च करने और प्रचार में धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री की कानूनी टीम ने इन दावों को भी निराधार बताया है। वकीलों का कहना है कि इन गंभीर आरोपों के समर्थन में याचिकाकर्ता ने कोई विशिष्ट तथ्य या साक्ष्य पेश नहीं किए हैं। कथित घटनाओं, बयानों या संचार के संबंध में कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

चुनावी खर्च को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाया गया है। उनका कहना है कि TVK के कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों द्वारा स्वतंत्र रूप से किया गया कोई भी खर्च उम्मीदवार के व्यक्तिगत चुनावी व्यय की श्रेणी में स्वतः नहीं आता है। जब तक याचिकाकर्ता यह साबित नहीं करता कि वह खर्च उम्मीदवार की सहमति से या उनके व्यक्तिगत खाते से हुआ, तब तक इसे खर्च सीमा का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

31 अगस्त को अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई है। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मद्रास हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि विजय द्वारा दाखिल किए गए रिजेक्ट द प्लेंट आवेदन को विधिवत नंबर दिया जाए और इसे आधिकारिक सूची में शामिल किया जाए। यह सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसी दिन यह तय हो जाएगा कि क्या DMK उम्मीदवार की याचिका पर विस्तृत सुनवाई जारी रहेगी या फिर इसे शुरुआती तकनीकी आपत्तियों के आधार पर खारिज कर दिया जाएगा।

तमिलनाडु की राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री विजय के शासन काल की एक बड़ी कानूनी अग्निपरीक्षा मानी जा रही है। विजय की टीम का पूर्ण विश्वास है कि अदालत कानून के दायरे में निष्पक्ष फैसला लेगी और बेबुनियाद आरोपों को खारिज कर दिया जाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप