बरसात के मौसम में सब्जी की खेती में न करें ये बड़ी भूलें, बंपर पैदावार के साथ होगा तगड़ा मुनाफा बिहार एक घंटा पहले 4
मानसून के दौरान सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान से बचने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सही जल निकासी और खाद के प्रयोग से किसान बारिश के सीजन में भी अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

बरसात में खेती के जोखिम और समाधान

मानसून का मौसम किसानों के लिए उम्मीद और चुनौती दोनों लेकर आता है। इस दौरान सब्जी की खेती में जोखिम बढ़ जाता है, क्योंकि अत्यधिक बारिश और जलजमाव के कारण तैयार खड़ी फसलें भी बर्बाद हो सकती हैं। पूर्णिया स्थित भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के सब्जी वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार के मुताबिक, सही प्रबंधन के साथ बारिश के मौसम में भी सब्जियों से शानदार उत्पादन हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस दौरान मिलने वाली धूप फसलों की वृद्धि के लिए काफी सहायक होती है, लेकिन किसानों को कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं।

जल निकासी का पुख्ता इंतजाम

बारिश के दिनों में सबसे बड़ी समस्या खेत में पानी का जमा होना है। यदि खेत में पानी अधिक समय तक रुकता है, तो पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं और फसल नष्ट हो जाती है। वैज्ञानिकों का स्पष्ट सुझाव है कि किसान खेती के लिए केवल उसी भूमि का चयन करें जहां जल निकासी की उचित सुविधा हो। यदि खेत समतल है और पानी रुकने की संभावना है, तो पौधों के चारों ओर छोटी क्यारियां और जल निकासी के लिए नालियां बनाना अनिवार्य है। ऐसा करने से बारिश का अतिरिक्त पानी बिना पौधों को नुकसान पहुंचाए खेत से बाहर निकल जाएगा।

उन्नत किस्म के बीजों का चयन

सब्जियों की अच्छी पैदावार केवल मेहनत पर ही नहीं, बल्कि बीजों की गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है। किसान अक्सर सामान्य बीजों का उपयोग कर बैठते हैं, जिससे बारिश में फसल कमजोर पड़ जाती है। हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीजों का ही चुनाव करना चाहिए। उन्नत बीज न केवल पौधों को रोगों से बचाने में मदद करते हैं, बल्कि फलने-फूलने की क्षमता को भी काफी हद तक बढ़ा देते हैं।

खाद डालने का सही तरीका

बारिश के दौरान खाद का प्रयोग करना एक बड़ी कला है। अक्सर किसान बिना मौसम को परखे खेत में खाद डाल देते हैं, जिससे बारिश का पानी उस उर्वरक को बहाकर ले जाता है। इससे न केवल किसानों का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि फसल को पोषण भी नहीं मिल पाता। सलाह दी जाती है कि खाद का छिड़काव तभी करें जब मौसम साफ हो और बारिश की संभावना न हो। खाद को हमेशा पौधों की जड़ों के समीप डालें ताकि मिट्टी में उसकी पकड़ बनी रहे और पौधा उसका अधिकतम लाभ उठा सके।

ग्रोथ रेगुलेटर का महत्व

फसल जब कटाई के करीब हो या फल देने की अवस्था में हो, तब ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग करना काफी लाभदायक साबित होता है। बारिश के मौसम में सब्जियों के पत्ते अक्सर पीले पड़कर झड़ने लगते हैं, साथ ही फूल गिरने की समस्या भी देखी जाती है। डॉ. विकास कुमार का कहना है कि सही समय पर ग्रोथ रेगुलेटर का छिड़काव करने से न केवल पत्तों का पीलापन दूर होता है, बल्कि फूलों और फलों को झड़ने से भी रोका जा सकता है। इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण तकनीकों को अपनाकर कोई भी किसान बरसात के दौरान अपनी सब्जी की खेती को मुनाफे का सौदा बना सकता है और बंपर पैदावार प्राप्त कर सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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