अमेरिका की बड़ी तैयारी: भारत के रक्षा बजट के बराबर खर्च कर बनाएगा 14 नई परमाणु पनडुब्बियां अमेरिका एक घंटा पहले 2
अमेरिकी नौसेना ने 76.6 अरब डॉलर के एक बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी है, जिसके तहत 14 अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह विशाल निवेश अमेरिका की समुद्र के भीतर युद्ध क्षमता और परमाणु प्रतिरोध को अगले कई दशकों तक मजबूती प्रदान करेगा।

समुद्री शक्ति को बढ़ाने के लिए अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा निवेश

अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर अपनी समुद्री सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने 29 जुलाई 2026 को कुल 76.6 अरब डॉलर, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 7.32 लाख करोड़ रुपये बैठता है, के एक बड़े जहाज निर्माण अनुबंध की आधिकारिक घोषणा की है। यह पूरी राशि भारत के वार्षिक रक्षा बजट के लगभग बराबर है, जो इस रक्षा सौदे के विशाल आकार को दर्शाता है। इस योजना के अंतर्गत 5 नई कोलंबिया क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और 9 नई वर्जीनिया क्लास परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बियां तैयार की जाएंगी। यह कदम न केवल अमेरिका की नौसैनिक श्रेष्ठता सुनिश्चित करेगा, बल्कि उसके परमाणु प्रतिरोध को भी दशकों तक के लिए अजेय बना देगा।

किन कंपनियों को मिला निर्माण का जिम्मा

इस मेगा प्रोजेक्ट को दो प्रमुख अमेरिकी रक्षा कंपनियों को सौंपा गया है। जनरल डायनेमिक्स इलेक्ट्रिक बोट यानी GDEB को विशेष रूप से 5 कोलंबिया क्लास पनडुब्बियों के निर्माण का ठेका मिला है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025 से 2029 के बीच बनाई जाने वाली 9 वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियों के लिए GDEB और HII-न्यूपोर्ट न्यूज शिपबिल्डिंग यानी HII-NNS को संयुक्त जिम्मेदारी दी गई है। इन कंपनियों को समय पर काम पूरा करने के लिए शिपयार्ड उत्पादकता कार्यक्रमों के तहत विशेष सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश समुद्री आधुनिकीकरण के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।

नौसेना के बेड़े की वर्तमान स्थिति

अमेरिकी नौसेना के पास वर्तमान में पहले से ही 26 वर्जीनिया क्लास परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बियां सक्रिय सेवा में तैनात हैं। इस नए और ऐतिहासिक अनुबंध के लागू होने के बाद, 23 और वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियां या तो पाइपलाइन में हैं या उनके निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोलंबिया क्लास की बात करें तो इस नए समझौते के बाद अमेरिका के पास कुल 7 ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां अनुबंध के दायरे में आ गई हैं। ये भविष्य में ओहायो क्लास की पुरानी पनडुब्बियों की जगह लेंगी और अमेरिकी समुद्री परमाणु शक्ति की नई रीढ़ साबित होंगी।

यह सौदा क्यों है अमेरिका के लिए अपरिहार्य

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुताबिक, यह निवेश उनकी अंडरसी वॉरफेयर यानी समुद्र के नीचे लड़े जाने वाले युद्ध की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह अमेरिका के न्यूक्लियर ट्रायड को आधुनिक बनाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। कोलंबिया क्लास पनडुब्बियां समुद्र के भीतर से परमाणु मिसाइलें दागने में सक्षम होंगी, जिससे अमेरिकी स्ट्रैटेजिक कमांड की मारक क्षमता बढ़ जाएगी। दूसरी ओर, वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियां स्टील्थ तकनीक से लैस होंगी, जिनका पता लगा पाना दुश्मनों के लिए बेहद मुश्किल होगा। इनकी लंबी दूरी तक प्रहार करने की क्षमता और मल्टी-डोमेन युद्ध कौशल इन्हें दुनिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार करता है।

नौसेना अधिकारियों का क्या कहना है

अमेरिकी नौसेना के सबमरीन प्रोग्राम्स के डायरेक्टर वाइस एडमिरल रॉबर्ट गौशर ने इस सौदे पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश अमेरिका की समुद्र के नीचे सैन्य श्रेष्ठता को बरकरार रखने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पनडुब्बियों का लगातार निर्माण सुनिश्चित करने से अमेरिका अपने वैश्विक कमांडरों को दुनिया के सबसे सुरक्षित और टिकाऊ युद्धक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता रहेगा। उनके अनुसार, यह सौदा न केवल विरोधियों को रोकने का काम करेगा, बल्कि दुनिया के प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी अमेरिका की सैन्य उपस्थिति और दबदबा बनाए रखेगा।

अमेरिकी कांग्रेस और रक्षा खरीद प्रणाली में बदलाव

इस पूरी परियोजना की सफलता के पीछे अमेरिकी कांग्रेस से मिलने वाला निरंतर वित्तीय समर्थन एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। रक्षा विभाग ने बजट प्रक्रिया के दौरान धन मुहैया कराने के लिए कांग्रेस का आभार व्यक्त किया है। अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर फॉर एक्विजिशन एंड सस्टेनमेंट माइकल पी. डफी ने इसे रक्षा खरीद प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव करार दिया है। उन्होंने बताया कि नौसेना और गौशर की टीम ने इस जटिल प्रक्रिया को सुगम बनाकर रक्षा औद्योगिक आधार को नई मजबूती दी है।

कोलंबिया और वर्जीनिया क्लास की विशेषताएं

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कोलंबिया क्लास पनडुब्बी अमेरिकी न्यूक्लियर ट्रायड का सबसे सुरक्षित हिस्सा मानी जाती है, जिसे रक्षा खरीद की शीर्ष प्राथमिकता का दर्जा प्राप्त है। वहीं वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियां बहुउद्देश्यीय भूमिका निभाने में माहिर हैं, जो दुनिया भर के किसी भी समुद्री क्षेत्र में लंबे समय तक चुपचाप रहकर दुश्मन पर नज़र रखने और जरूरत पड़ने पर हमला करने में सक्षम हैं। ये दोनों प्रणालियां मिलकर अमेरिका के रणनीतिक प्रतिरोध को अभेद्य बनाती हैं और वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में सहयोग करती हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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