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2 घंटे पहले
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विचारों
अमेरिकी संसद में बदला सत्ता का गणित
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की शानदार जीत ने वॉशिंगटन की सियासी तस्वीर पूरी तरह से पलट कर रख दी है। इन चुनावों के नतीजों के बाद अमेरिकी संसद के दोनों प्रमुख सदनों, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, पर अब विपक्षी डेमोक्रेट्स का पूर्ण नियंत्रण हो गया है। इस राजनीतिक उलटफेर के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उनकी पार्टी अब संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में आ गई है। इस स्थिति का सीधा प्रभाव ट्रंप के विधायी एजेंडे पर पड़ना तय है, क्योंकि किसी भी नए कानून को पारित कराना अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
वीटो पावर का संवैधानिक महत्व
भले ही मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने ट्रंप की स्थिति को कमजोर करने का प्रयास किया हो, लेकिन अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को एक बेहद शक्तिशाली अधिकार देता है जिसे प्रेसिडेंशियल वीटो कहा जाता है। यह अधिकार राष्ट्रपति को सांसदों द्वारा पारित किसी भी विधेयक को कानून बनने से रोकने की शक्ति प्रदान करता है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही यह स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वे डेमोक्रेटिक पार्टी के किसी भी ऐसे एजेंडे को रोकने के लिए तैयार हैं जो उनके प्रशासन के हितों के खिलाफ होगा। इस स्थिति ने संसद और सरकार के बीच टकराव की संभावनाओं को और गहरा कर दिया है। सवाल यह है कि यदि राष्ट्रपति के पास विधायी बिलों को खारिज करने का अधिकार है, तो क्या डेमोक्रेट्स अपने चुनावी वादों को धरातल पर उतार पाएंगे?
कैसे काम करता है प्रेसिडेंशियल वीटो
अमेरिकी संविधान का आर्टिकल I, सेक्शन 7 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वे कार्यपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखें। इस प्रणाली के तहत, संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया कोई भी बिल अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति के पास रविवार को छोड़कर 10 दिनों का समय होता है। इस दौरान राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं। वे या तो बिल पर हस्ताक्षर कर उसे कानून बना सकते हैं, उसे अपनी आपत्तियों के साथ संसद को वापस भेज सकते हैं, या फिर समय सीमा समाप्त होने तक उसे लंबित रख सकते हैं। यदि राष्ट्रपति बिल को अस्वीकार करते हैं, तो उसे नियमित वीटो कहा जाता है।
वीटो को निरस्त करना क्यों है एक टेढ़ी खीर
विधायी प्रक्रिया का अंत किसी बिल के रिजेक्शन से ही नहीं हो जाता। संसद के पास प्रेसिडेंशियल वीटो को ओवरराइड यानी निरस्त करने का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, यह प्रक्रिया अत्यंत कठिन है क्योंकि इसके लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। 435 सदस्यों वाले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस वीटो को पलटने के लिए कम से कम 290 वोटों की दरकार होगी, जबकि 100 सदस्यीय सीनेट में कम से कम 67 वोटों की आवश्यकता पड़ेगी। 2026 के इन चुनावों में जीत के बावजूद डेमोक्रेट्स के पास अकेले दम पर दो-तिहाई बहुमत हासिल करना लगभग असंभव है। उन्हें अपने किसी भी कानून को लागू करवाने के लिए रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की सख्त आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं दिखता।
ऐतिहासिक आंकड़े और ट्रंप की रणनीति
अमेरिकी कांग्रेसनल रिकॉर्ड पर अगर नजर डालें, तो 1789 से अब तक कुल 2,599 प्रेसिडेंशियल वीटो इस्तेमाल किए गए हैं, जिनमें से केवल 112 ही ऐसे मौके रहे हैं जब संसद वीटो को निरस्त करने में सफल रही हो। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राष्ट्रपति के पास कानून को रोकने की कितनी प्रभावी ताकत है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी इन चुनाव परिणामों के आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे आने वाले समय में अपने इस अधिकार का उपयोग करने के लिए तैयार हैं।
पॉकेट वीटो का ब्रह्मास्त्र
सामान्य वीटो के अलावा ट्रंप के पास एक और बेहद शक्तिशाली संवैधानिक हथियार है जिसे पॉकेट वीटो कहा जाता है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को किसी बिल को संसद में वापस भेजे बिना ही उसे पूरी तरह समाप्त करने की छूट देता है। यदि राष्ट्रपति 10 दिन की समय सीमा के भीतर किसी बिल पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं और इस बीच संसद का सत्र समाप्त हो जाता है, तो वह बिल अपने आप निष्प्रभावी हो जाता है। पॉकेट वीटो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि संसद इसे किसी भी वोट के जरिए निरस्त नहीं कर सकती। यदि कानून को दोबारा जीवित करना हो, तो संसद को पूरी विधायी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करना होगा, जो समय और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण बेहद मुश्किल साबित हो सकता है। यह टूल तब और भी कारगर हो जाता है जब संसद का कार्यकाल समापन की ओर हो। हालांकि, पॉकेट वीटो का इस्तेमाल करने के लिए भी कुछ संवैधानिक मर्यादाएं तय की गई हैं, जिनका पालन करना राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य है।
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