उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विधानसभा में मिली मंजूरी
योगी आदित्यनाथ सरकार ने डॉ आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हाल ही में विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट के दौरान इस योजना के लिए 407 करोड़ रुपये के आवंटन को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है। राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूरे उत्तर प्रदेश में स्थित डॉ आंबेडकर की प्रतिमाओं का संरक्षण और सुंदरीकरण करना है।
क्या-क्या कार्य किए जाएंगे
सरकार की योजना के तहत प्रदेश भर में डॉ आंबेडकर की सभी प्रतिमाओं पर सुरक्षा और सम्मान के दृष्टिगत छत्र लगाए जाएंगे। साथ ही, इन प्रतिमाओं के चारों ओर बाउंड्री वॉल का निर्माण भी करवाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर डॉ आंबेडकर के 10 स्मारकों के विकास कार्यों पर यह धनराशि खर्च की जाएगी। केवल डॉ आंबेडकर ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और वाल्मिकी जैसे अन्य महान महापुरुषों के स्मारकों का कायाकल्प और विकास भी सुनिश्चित करेगी।
राजनीतिक समीकरण और दलित वोट बैंक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 22 फीसदी है। राज्य की कुल 86 आरक्षित सीटों में से 84 सीटें दलितों के लिए ही आरक्षित हैं। इतना ही नहीं, राज्य की करीब 150 विधानसभा सीटों पर जीत-हार का फैसला सीधे तौर पर दलित मतदाताओं की भागीदारी से तय होता है।
बदलती चुनावी हवा का असर
एक लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को दलित राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था, जिन्होंने 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनाई थी। हालांकि, पिछले तीन विधानसभा चुनावों यानी 2012, 2017 और 2022 में पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है और वर्तमान में बसपा के पास विधानसभा में मात्र एक विधायक है, जबकि लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। साल 2014 से भाजपा की ओर दलित वोटों का झुकाव बढ़ा था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों में यह रुझान इंडिया गठबंधन के पक्ष में जाता दिखा, जिसके चलते गठबंधन ने 80 में से 43 सीटें जीतीं। अब भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए इस दलित वोट बैंक को पुनः अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास में जुटी है।
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