उत्तर प्रदेश
54 मिनट पहले
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां के लगड़ा बाजार टोला भगवानपुर के रहने वाले एक युवक की सुदूर देश वेनेजुएला में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक युवक की पहचान 33 वर्षीय राकेश चौहान के रूप में हुई है। राकेश की मौत की खबर मिलने के बाद से उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। हालांकि, यह मामला सिर्फ एक सामान्य हादसे का नहीं रह गया है, बल्कि मृतक के परिजनों ने नियोजक कंपनी पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि राकेश के शव से महत्वपूर्ण अंग गायब कर दिए गए हैं, जिससे अंग तस्करी की आशंका गहरा गई है।
नौकरी पर जाने के बाद आई मौत की दुखद खबर
मृतक राकेश चौहान साल 2025 के नवंबर महीने में वेनेजुएला में मर्चेंट नेवी की नौकरी के लिए रवाना हुए थे। वह वहां एक समुद्री जहाज पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसी बीच, अचानक उनके परिवार वालों को मुंबई स्थित कंपनी के कार्यालय से एक बेहद दुखद सूचना मिली। परिजनों को बताया गया कि राकेश चौहान का निधन हो चुका है। शुरुआती जानकारी में कंपनी की ओर से कहा गया कि राकेश का शव 60 दिनों के भीतर उनके पैतृक निवास स्थान पर पहुंचा दिया जाएगा।
इसके बाद चिंतित और बदहवास परिवार के सदस्य मुंबई में कंपनी के दफ्तर पहुंचे। वहां अधिकारियों से बातचीत करने के बाद काफी कोशिशों के बाद आखिरकार 4 जून की शाम को 7 बजे राकेश का शव परिजनों को सौंपा गया। इससे पहले फोन पर हुई बातचीत में कंपनी ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की थी। उन्हें पहले बताया गया कि राकेश जहाज पर फिसल कर गिर गए हैं, जिससे उन्हें चोटें आई हैं और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इसके ठीक अगले ही दिन सुबह परिवार को दोबारा फोन आया, जिसमें कहा गया कि राकेश की हालत बेहद नाजुक है और उनके बचने की उम्मीद मात्र 5 प्रतिशत बची है, यानी 95 प्रतिशत उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है।
डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम करने से किया साफ इनकार
जब राकेश के शव को वापस भारत लाया गया, तो उसकी मौत के कारणों को लेकर कई तरह के संदेह पैदा हो गए। कंपनी ने पहले परिजनों को बताया था कि राकेश को अचानक चक्कर आ गया था, जिसके चलते वह जहाज पर गिर पड़े और गंभीर चोटों की वजह से उनकी मृत्यु हो गई। इस स्पष्टीकरण से असंतुष्ट राकेश के पिता और उनकी पत्नी जब मुंबई दफ्तर गए, तो कंपनी ने आश्वासन दिया था कि 1 सप्ताह के भीतर शव को घर भेज दिया जाएगा।
हालांकि, शव को देवरिया पहुंचने में लगभग 1 महीने का लंबा समय लग गया। जब शव अंततः देवरिया पहुंचा, तो वहां स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में डॉक्टरों के एक पैनल को पोस्टमार्टम करने के लिए बुलाया गया। लेकिन जब डॉक्टरों की टीम ने शव का निरीक्षण किया, तो वे हैरान रह गए और उन्होंने पोस्टमार्टम करने से साफ मना कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि शव को देखने से ऐसा साफ प्रतीत होता है कि इसका पोस्टमार्टम पहले ही किया जा चुका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि राकेश के शरीर के अंदरूनी अंग पूरी तरह गायब थे।
परिजनों ने लगाया धोखा देने का आरोप, की जांच की मांग
डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम से मना करने और अंगों के गायब होने की बात सामने आने के बाद मृतक के पिता ने अपना दर्द और गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि उनके परिवार को पूरी तरह से धोखे में रखा गया है। शव का पोस्टमार्टम पहले ही किया जा चुका था ताकि सच को छुपाया जा सके।
इसके बाद स्थानीय जिलाधिकारी यानी DM के विशेष हस्तक्षेप और आदेश के बाद शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इस दूसरे पोस्टमार्टम में भी यह कड़वा सच सामने आया कि शरीर के मुख्य अंग पूरी तरह से नदारद हैं, जिसके कारण मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाना असंभव हो गया है। पीड़ित पिता ने सरकार से इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।
पीड़ित परिवार ने लगाई सरकार से न्याय की गुहार
इस पूरे मामले को लेकर राकेश की पत्नी ने भी न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है:
- भारतीय दूतावास को ईमेल भेजकर न्याय और हस्तक्षेप की अपील की गई है।
- केंद्रीय जल परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में जांच की मांग की गई है।
- जिस कंपनी में राकेश कार्यरत थे, उसके प्रबंधन को भी ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण और जवाब मांगा गया है।
राकेश अपने परिवार के सबसे बड़े बेटे थे, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। उनके परिवार में उनका एक छोटा भाई है जिसका नाम मुकेश है। राकेश की शादी साल 2023 में हुई थी और उनका एक छोटा सा बेटा है जिसकी उम्र मात्र 6 महीने है। इस घटना के बाद से पत्नी और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे सरकार से जल्द से जल्द इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।
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