Nainital की असली पहचान: DSB कैंपस का हिमालय संग्रहालय समेटे हुए है इतिहास के अनमोल पन्ने जीवनशैली एक महीने पहले 41
अगर आप नैनीताल की सैर पर जा रहे हैं, तो नैनी झील के अलावा DSB कैंपस स्थित हिमालय संग्रहालय देखना न भूलें। यह जगह उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है।

नैनीताल की अनमोल धरोहर

नैनीताल में घूमने के लिए नैनी झील, मॉल रोड और स्नो व्यू के अलावा एक और ऐसी जगह है जो पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर खींचती है। यह है DSB कैंपस में बना हिमालय संग्रहालय। यह संग्रहालय सिर्फ पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि हिमालय, कुमाऊं और गढ़वाल की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ आपको कुमाऊं के प्राचीन इतिहास की झलक मिलेगी, जिसमें दुर्लभ पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज, पुरातात्विक अवशेष और प्राचीन मूर्तियां शामिल हैं।

1987 में हुई थी स्थापना

इस संग्रहालय की शुरुआत का श्रेय डॉ. मदन चंद्र भट्ट को जाता है, जो अपने विद्यार्थियों को हमेशा पुरानी और ऐतिहासिक वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करते थे। साल 1987 में प्रोफेसर अजय रावत ने इसे एक व्यापक रूप दिया। इस काम में डॉ. शेखर पाठक और हीरा सिंह भाकुनी ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज इस संग्रहालय में 11वीं और 12वीं शताब्दी की दुर्लभ मूर्तियों के साथ-साथ कत्यूर, चंद और परमार राजवंशों से जुड़ी निशानियां भी मौजूद हैं।

संग्रहालय के मुख्य आकर्षण

  • ज्योतिष परंपरा: यहाँ 12 फीट लंबी जन्म कुंडली मौजूद है, जो उत्तराखंड की ज्योतिष परंपरा को दर्शाती है।
  • ऐतिहासिक वस्तुएं: संग्रहालय में रानी कर्णावती की प्रतिमा, चंद राजाओं की तलवारें, देवीधुरा की ऐतिहासिक ढालें और पिथौरागढ़ की हिलजात्रा में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक मुखौटे रखे गए हैं।
  • शिलालेख: कुमाऊं के कत्यूर वंश से जुड़े शिलालेखों का विशेष संग्रह यहाँ उपलब्ध है। इनमें से कुछ प्रतिकृतियां साल 1988 में बद्रीनाथ से प्राप्त तस्वीरों के आधार पर तैयार की गई हैं।
  • पंडित गोविंद बल्लभ पंत की यादें: संग्रहालय का एक बड़ा हिस्सा भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत को समर्पित है, जहाँ उनके जीवन की दुर्लभ तस्वीरें संजोकर रखी गई हैं।

मुफ्त में देखें इतिहास

संग्रहालय को तीन अलग-अलग जोन में बांटा गया है, जहाँ शिलालेखों से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक की झलक व्यवस्थित रूप से दिखाई गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस संग्रहालय में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटक और शोधार्थी बिना किसी टिकट के DSB कॉलेज कैंपस स्थित इस अमूल्य धरोहर को देख सकते हैं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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