गोलकोंडा किले की 400 साल पुरानी शाही बावड़ी, जिसकी इंजीनियरिंग देख रह जाएंगे हैरान जीवनशैली एक महीने पहले 24
हैदराबाद के गोलकोंडा किले में मौजूद शाही बावड़ी कुतुबशाही दौर की उन्नत जल प्रबंधन व्यवस्था की मिसाल है, जो आज भी अपनी बनावट और इतिहास से पर्यटकों को लुभाती है।

हैदराबाद के मशहूर गोलकोंडा किले में बनी शाही बावड़ी सदियों बाद भी अपनी खास बनावट और रहस्यों भरे अतीत की वजह से सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे किले की सबसे बड़ी जल बावड़ी माना जाता है और यह कुतुबशाही शासनकाल की विकसित जल प्रबंधन प्रणाली का बेजोड़ नमूना पेश करती है।

शासकों के विश्राम और आनंद का स्थल

इतिहासकार बताते हैं कि कभी इस बावड़ी के बीचों-बीच एक खूबसूरत फव्वारा हुआ करता था। इसी फव्वारे के आसपास बैठकर तत्कालीन शासक प्राकृतिक माहौल और पानी की उठती फुहारों का आनंद लिया करते थे। यह जगह उनके लिए सुकून और मनोरंजन का केंद्र थी।

सिर्फ सुंदरता ही नहीं, पानी का मुख्य स्रोत भी

यह बावड़ी केवल देखने में सुंदर भर नहीं थी, बल्कि इसका एक अहम व्यावहारिक उद्देश्य भी था। पूरे किले तक पानी पहुंचाने में यही बावड़ी प्रमुख स्रोत की भूमिका निभाती थी, जिससे उस दौर की दूरदर्शी इंजीनियरिंग और जल व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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