भारत
3 महीने पहले
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सत्र से बाहर किए गए कल्याण बनर्जी
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल्याण बनर्जी को वर्तमान मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के चलते अब वे आगामी दिनों तक संसद की किसी भी कार्यवाही में शामिल नहीं हो पाएंगे। बताया जा रहा है कि यह निलंबन काकोली घोष दस्तीदार और सायोनी घोष जैसी महिला सांसदों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों और अभद्र भाषा का उपयोग करने के कारण किया गया है।
सदन की गरिमा को लेकर उठाया गया कदम
संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में कल्याण बनर्जी को सत्र की बाकी अवधि के लिए सदन से बाहर करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा था, जिसे सदन ने अपनी मंजूरी दे दी। उस समय सदन की अध्यक्षता कर रहे TDP सांसद KP कृष्णा प्रसाद टेन्नेटी ने स्पष्ट किया कि स्पीकर को महिला सांसदों के प्रति अभद्र व्यवहार और मर्यादित भाषा का प्रयोग न करने की लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
NCPI सांसदों के साथ हुआ था विवाद
इससे पहले संसद के भीतर उस समय माहौल गर्म हो गया था जब सदन की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के चलते स्थगित कर दी गई थी। उसी दौरान लोकसभा चैंबर के अंदर कल्याण बनर्जी की अपनी ही पार्टी के पूर्व साथियों और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के सांसदों के बीच तीखी बहस हो गई थी। इस बहस के दौरान NCPI की सदस्य शताब्दी रॉय, मिताली बाग और काकोली घोष दस्तीदार प्रमुख रूप से मौजूद थीं। हालांकि, इस विवाद के सटीक कारणों का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हो पाया है।
स्पीकर से मिले थे NCPI के सदस्य
इस अप्रिय घटना के बाद NCPI के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें मिताली बाग और काकोली घोष दस्तीदार भी शामिल थीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके चैंबर में मिलने पहुंचा था। सूत्रों का दावा है कि स्पीकर ने NCPI सांसदों को इस पूरे मामले पर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
पार्टी से बगावत का इतिहास
यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद से पनपे मतभेदों का परिणाम माना जा रहा है। चुनाव में मिली हार के बाद TMC के करीब 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी और बाद में वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए थे। इस घटना के बाद से ही लोकसभा में इन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों से अलग अपनी बैठने की व्यवस्था कर ली है। NCPI का उदय और उसमें तृणमूल के बागियों का शामिल होना संसद के भीतर समीकरणों को पूरी तरह बदल चुका है।
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