तिब्बत में चीन का दखल बढ़ा, वाशिंगटन में निर्वासित तिब्बती सरकार को सशक्त बनाने की मांग विश्व 2 घंटे पहले 3
तिब्बत पर चीन के बढ़ते राजनीतिक दबाव और तिब्बतियों को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों के बीच इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत ने अमेरिकी संसद से मदद की गुहार लगाई है।

तिब्बत की सत्ता में घटती भागीदारी पर चिंता

तिब्बत पर अपना पूरा वर्चस्व कायम करने के इरादे से चीन लगातार नई रणनीतियां अपना रहा है। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि चीन सरकार जानबूझकर प्रशासनिक ढांचे में तिब्बती मूल के लोगों की भागीदारी को कम कर रही है। वाशिंगटन स्थित अधिकार समूह इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चीन महत्वपूर्ण सरकारी पदों से तिब्बतियों को धीरे-धीरे बाहर का रास्ता दिखा रहा है। इससे तिब्बत के राजनीतिक फैसलों में स्थानीय तिब्बतियों की भूमिका न के बराबर रह गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

सीटीए (CTA) के समर्थन के लिए आगे आई मांग

इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत ने अमेरिकी सांसदों से पुरजोर मांग की है कि भारत और नेपाल में बसे तिब्बती समुदायों की मदद के लिए मानवीय और आर्थिक सहायता को फिर से पूरी तरह बहाल किया जाए। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य धर्मशाला में स्थित सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) की कार्यक्षमता को बढ़ाना है। यह निर्वासित सरकार विश्व भर में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों का प्रतिनिधित्व करती है और स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन करती है। वर्तमान में 14वें दलाई लामा तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु हैं, जबकि राजनीतिक कमान सिक्योंग के हाथों में है।

भारत का आधार और अमेरिकी अधिनियम की उम्मीद

इस मुद्दे पर इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के अनुसंधान और निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने मंगलवार को स्थिति स्पष्ट की। उनका मानना है कि भारत वह मजबूत आधार प्रदान करता है, जहां तिब्बती समुदाय स्वतंत्र रूप से अपने कार्यों को अंजाम दे पा रहा है। त्सेरिंग के मुताबिक, अमेरिका में तिब्बत का मुद्दा दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सहमति का विषय है। उन्होंने अमेरिकी संसद में लंबित 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' (AFTA) को जल्द पारित करने पर जोर दिया। उनका तर्क है कि इस अधिनियम के लागू होने से सीटीए को तिब्बतियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधि के रूप में वैश्विक स्तर पर और अधिक वैधता प्राप्त होगी।

आंकड़ों की जुबानी चीन की चाल

रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि चीन किस तरह पार्टी के निर्देशों और नए कानूनों के जरिए तिब्बत की नीतियों पर कब्जा जमा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 तक प्रांतीय और काउंटी स्तर पर सुरक्षा, न्यायपालिका और सरकारी निकायों के 10 प्रमुख संस्थानों में कुल 240 उच्च पद चिन्हित किए गए थे। इनमें से केवल 62 पदों पर ही तिब्बती नागरिक नियुक्त थे, जो कुल हिस्सेदारी का महज 25.8 प्रतिशत है। इसके विपरीत, 178 पद यानी 74.2 प्रतिशत हिस्से पर गैर-तिब्बती अधिकारी काबिज हैं। यह अनुपात साफ दिखाता है कि तिब्बत में प्रशासन अब पूरी तरह बाहरी नियंत्रण में जा चुका है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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