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एक घंटा पहले
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ठाणे में एटीएस का सफल ऑपरेशन
महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस ने राज्य के ठाणे जिले में एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है। एटीएस की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर ठाकुरली इलाके से एक ऐसे माओवादी को गिरफ्तार किया है, जिस पर झारखंड पुलिस ने 10 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित कर रखा था। पकड़ा गया आरोपी लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहा था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
खुफिया जानकारी और गिरफ्तारी की रणनीति
एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों को पुख्ता जानकारी मिली थी कि झारखंड पुलिस द्वारा वांछित एक कुख्यात माओवादी महाराष्ट्र के ठाणे जिले के ठाकुरली क्षेत्र में ठिकाना बनाए हुए है। इस जानकारी की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और उस स्थान की घेराबंदी शुरू कर दी। एटीएस की टीम ने बेहद कुशलता से जाल बिछाया और 45 वर्षीय संजय सरजू यादव, जिसे गोदाराम यादव के नाम से भी जाना जाता है, को दबोच लिया। आरोपी पिछले करीब 10 दिनों से ठाकुरली में छिपकर रह रहा था और अपनी पहचान छुपाने की कोशिश कर रहा था।
आरोपी की पृष्ठभूमि और झारखंड पुलिस को सुपुर्दगी
प्रारंभिक पूछताछ और जांच से पता चला है कि संजय सरजू यादव झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर थाना अंतर्गत आने वाले देवगन गांव का मूल निवासी है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का एक सक्रिय सदस्य रहा है। गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने अपनी सभी औपचारिकताएं पूरी कीं और आरोपी को झारखंड पुलिस के हवाले कर दिया। झारखंड पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
झारखंड में माओवादियों के खिलाफ जारी है अभियान
झारखंड में सुरक्षा बल केंद्र और राज्य की विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर माओवादी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए एक विशेष मिशन चला रहे हैं। राज्य भर में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। माओवादियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे इस अभियान के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। इसी साल के अक्टूबर महीने में सुरक्षा बलों ने झारखंड में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए माओवादी संगठन के सब-रीजनल कमांडर कुंवर मांझी उर्फ सहदेव मांझी को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। वहीं, जुलाई महीने में रांची में रीजनल कमांडर संतोष महतो सहित कुल 16 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए आत्मसमर्पण किया था, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई
वर्तमान में सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य माओवादी नेटवर्क की बची-खुची कड़ियों को तोड़ना और इसे पूरी तरह समाप्त करना है। सरकार की ओर से लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और साथ ही उन नक्सलियों को सरेंडर करने का मौका दिया जा रहा है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस साल की शुरुआत में कहा था कि भारत में लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म यानी नक्सलवाद का प्रभाव काफी हद तक कम हो चुका है और देश अब इससे मुक्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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