राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
वैश्विक अस्थिरता पर रक्षा मंत्री की दो टूक
ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विश्व की वर्तमान स्थिति पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने वैश्विक नेताओं के समक्ष स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया आज एक बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में आर्थिक मंदी और संसाधनों की किल्लत का संकट विकराल रूप धारण कर सकता है। रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर गहराते भू राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशों के बीच बढ़ता टकराव और सीमावर्ती तनाव ने सामानों की आपूर्ति व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। आज एक देश से दूसरे देश तक जरूरी वस्तुओं को पहुंचाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस तनावपूर्ण स्थिति का असर अब सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने साफ किया कि तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र में देशों के बीच बढ़ती दूरी पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही है।
ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की चुनौती
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को गंभीरता से उठाते हुए सदस्य देशों को आगाह किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आने वाले दिनों में कई देशों की विकास यात्रा थम सकती है यदि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की किल्लत को नियंत्रित नहीं किया गया। रक्षा मंत्री द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार चढ़ाव और उपलब्धता का संकट कई देशों की अर्थव्यवस्था को धीमा कर सकता है।
- अनाजों और अनिवार्य खाद्य उत्पादों की कमी से दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई और भुखमरी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
- कई विकासशील मुल्कों के लिए अब अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना अस्तित्व बचाने की लड़ाई के समान हो गया है।
तकनीक और सामाजिक असमानता
आधुनिक तकनीक पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक ने दुनिया का चेहरा तो बदला है, लेकिन यह बदलाव हर किसी के लिए समान रूप से फायदेमंद साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि एडवांस टेक्नोलॉजी की इस अंधी दौड़ ने संपन्न और कमजोर देशों के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। तकनीकी होड़ में कुछ देश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कई देश पीछे छूटते जा रहे हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक असमानता पैदा हो रही है।
बैठकों से आगे बढ़ने की आवश्यकता
अंत में, राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि संगठन की असली सफलता केवल बैठकों में भाग लेने से नहीं, बल्कि साझा मुद्दों पर आम सहमति बनाने और ठोस धरातलीय काम करने में निहित है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि बदलते वैश्विक हालात में सिर्फ चर्चाएं करना पर्याप्त नहीं है। सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य है कि वे आपसी सहमति और सहयोग के आधार पर इन चुनौतियों का ठोस समाधान निकालें, ताकि भविष्य के खतरों से निपटा जा सके।
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