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एक घंटा पहले
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कोयंबटूर में पुलिस के लिए सिरदर्द बना आरोपी
तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 25 वर्षीय विचाराधीन कैदी राघवन ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राघवन केवल 24 घंटे के भीतर दो बार पुलिस की हिरासत से चकमा देकर फरार हो गया था। पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उसे इरोड जिले के सत्यमंगलम वन क्षेत्र से ढूंढ निकाला गया। अब रेसकोर्स पुलिस आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि कोयंबटूर केंद्रीय जेल से भागने के बाद वह किन परिस्थितियों में और किस तरह से इतने घने जंगल तक पहुंचने में कामयाब रहा।
जांच के दायरे में मदद करने वाले संदिग्ध
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ता इस एंगल पर काम कर रहे हैं कि क्या राघवन को फरार होने और उसके बाद सुरक्षित स्थान पर छिपने के दौरान किसी बाहरी व्यक्ति या किसी गिरोह ने मदद की थी। पुलिस ने राघवन उर्फ कोजिकरण का बयान दर्ज कर लिया है और पूरी घटना की कड़ियों को आपस में जोड़कर दोबारा जांच की जा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर सुरक्षा घेरे को तोड़कर वह बार-बार बाहर निकलने में कैसे सफल हो गया।
ड्रोन का इस्तेमाल कर बिछाया जाल
राघवन के दोबारा भागने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने युद्धस्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। उसकी तलाश के लिए कुल छह विशेष टीमों का गठन किया गया था। यह तलाशी अभियान न केवल इरोड और नीलगिरी जिलों में चलाया गया, बल्कि इसकी पहुंच पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और केरल तक भी थी। जब पुलिस को यह गुप्त सूचना मिली कि राघवन सत्यमंगलम के जंगलों में कहीं छिपा हुआ है, तो प्रशासन ने फौरन ड्रोन कैमरों की मदद ली। रात भर चले विशेष ऑपरेशन के दौरान ड्रोन से मिली फुटेज के आधार पर राघवन के सही ठिकाने की पहचान की गई और उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया।
अपराधों और फरारी का पुराना इतिहास
बता दें कि राघवन मूल रूप से इरोड जिले के भवानीसागर स्थित श्रीलंकाई तमिल पुनर्वास केंद्र का निवासी है। उस पर डकैती और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के कई मामले पहले से ही दर्ज हैं। उसका पिछला रिकॉर्ड भी भागने वाला ही रहा है। इससे पहले जून 2026 में भी उसे बेंगलुरु ले जाते समय वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
हिरासत में लापरवाही पर बड़ा एक्शन
घटनाक्रम का विवरण दें तो पुलिस ने उसे 30 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उसी दिन शाम को वह अन्नूर पुलिस स्टेशन की हिरासत से भागने में सफल रहा, हालांकि उस समय पुलिस ने तुरंत पीछा कर उसे दोबारा पकड़ लिया। इसके बाद उसी रात, एक सब-इंस्पेक्टर सहित चार पुलिसकर्मियों की टीम उसे रिमांड के लिए कोयंबटूर केंद्रीय जेल ले जा रही थी। जेल परिसर में पहुंचते ही राघवन ने मौका देखकर सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया और फिर से फरार हो गया। इस गंभीर लापरवाही के चलते अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से उन चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही, उसके भागने को लेकर एक अलग से मुकदमा भी दर्ज किया गया है। अब पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। पूछताछ पूरी होने के बाद राघवन को अदालत में पेश किया जाएगा और इस बार उसे रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि वह भविष्य में दोबारा भागने की हिम्मत न कर सके।
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