राष्ट्रीय राजनीति
7 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट से ज्ञानेश कुमार को बड़ी राहत
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के भविष्य को लेकर चल रही कानूनी गहमागहमी के बीच सुप्रीम कोर्ट से उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अपने पद से ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश पारित करने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया है। इसके साथ ही, यह साफ हो गया है कि वह फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग से संबंधित एक विवाद पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
याचिकाकर्ता की दलील और अदालत का रुख
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने के लिए तुरंत अंतरिम आदेश जारी किया जाए। विकास सिंह ने तर्क दिया कि यदि इस मामले में तत्काल कोई कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है और देश में अशांति फैल सकती है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
इस दलील पर सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने प्रतिक्रिया दी। बेंच में शामिल अन्य न्यायाधीशों में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी मौजूद थे। पीठ ने कहा कि अखबारों या मीडिया में छपी रिपोर्ट के आधार पर किसी को निलंबित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे रिपोर्ट सही भी हो सकती हैं और गलत भी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वे इसकी जांच कर रहे हैं।
अदालत ने केंद्र और ECI को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी भी कठोर कदम से बचते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग यानी ECI को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि न्यायिक रिकॉर्ड से यह बात सामने आती है कि चुनाव आयोग का संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो अदालत उन आदेशों को रद्द करने का अधिकार रखती है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
फिलहाल ज्ञानेश कुमार को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निलंबन की मांग को ठुकरा दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। तब तक के लिए सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला चुनाव आयोग के फैसलों की प्रक्रिया और उसकी स्वायत्तता से सीधे जुड़ा हुआ है, जिस पर आने वाले दिनों में देश की निगाहें टिकी रहेंगी।
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