दिल्ली में जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: एमिकस क्यूरी ने प्रदूषण को बताया रोजाना 30 सिगरेट के बराबर, CJI बोले पुराने हथकंडे अब बंद हों राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
दिल्ली की बिगड़ी हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने प्रदूषण की तुलना रोजाना 30 सिगरेट पीने से की। इस पर CJI सूर्यकांत ने निर्माण कार्य रोकने और वाहनों पर प्रतिबंध जैसे उपायों को नाकाम और पुराना तरीका करार दिया।

दिल्ली के वायु प्रदूषण पर सर्वोच्च अदालत में सुनवाई

देश की राजधानी दिल्ली में हवा की लगातार बिगड़ती स्थिति और जहरीली होती आबोहवा के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस हुई। अदालत के समक्ष दिल्ली में सांस लेने की विकट परिस्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई और प्रदूषण रोकने के लिए लागू किए जा रहे वर्तमान तरीकों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए गए।

रोजाना 30 सिगरेट पीने जितना नुकसान

मामले में अदालत की सहायता कर रहीं एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने राजधानी की वर्तमान स्थिति का भयावह ब्योरा पेश किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जहरीली हवा में सांस लेना रोजाना 30 सिगरेट पीने जितना हानिकारक हो चुका है। इस वक्तव्य के माध्यम से शहर में वायु गुणवत्ता के चिंताजनक स्तर को उजागर किया गया।

पुराने हथकंडे और नाकाम उपाय बंद हों: CJI सूर्यकांत

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने प्रदूषण से निपटने के लिए बार-बार अपनाए जाने वाले पारंपरिक और तात्कालिक कदमों पर अपनी असहमति व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि:

  • वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना और निर्माण गतिविधियों को रोकना जैसे कदम पुराने पड़ चुके हैं।
  • ये सभी उपाय एक प्रकार का असफल फायर फाइटिंग मैकेनिज्म बनकर रह गए हैं जिनसे स्थायी समाधान नहीं निकलता।

पराली, वाहनों के धुएं और टोल प्लाजा पर चर्चा

सुनवाई के दौरान दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले विभिन्न कारणों और उनके संभावित समाधानों पर विस्तृत बातचीत हुई। अदालत में कई प्रमुख बिंदु उठाए गए:

  • पराली जलाने का मुद्दा: कृषि अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए किसानों को पर्याप्त मशीनें मुहैया कराने पर चर्चा हुई।
  • वाहनों से उत्सर्जित धुआं: सड़कों पर गाड़ियों की वजह से बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के पहलुओं पर विचार किया गया।
  • टोल प्लाजा पर गाड़ियों की कतारें: टोल पर लगने वाली वाहनों की लंबी लाइनों के कारण होने वाले ईंधन उत्सर्जन और उससे पैदा होने वाले धुएं के मुद्दे को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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