बुरहानपुर के किसान अजय ने बदली खेती की सूरत, 10 एकड़ में मिश्रित फसलों से बंपर मुनाफा व्यापार 3 घंटे पहले 4
बुरहानपुर के युवा किसान अजय प्रजापति ने पारंपरिक खेती से हटकर मिश्रित खेती को अपनाया है। आज वे 10 एकड़ भूमि पर कई तरह की फसलें उगाकर न केवल शानदार कमाई कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।

खेती के पारंपरिक ढर्रे को दी चुनौती

खेती के क्षेत्र में अगर सही रणनीति और विविध फसलों का चुनाव किया जाए, तो किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकते हैं। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के युवा किसान अजय प्रजापति की कहानी इसी बदलाव की एक मिसाल है। अपने दोस्तों से मिली सलाह और प्रेरणा के बाद अजय ने खेती के अपने पुराने तरीके को पूरी तरह से बदल दिया और मिश्रित खेती यानी मिक्स फार्मिंग की राह चुनी। आज उनके खेत लहलहा रहे हैं और उनकी मेहनत का परिणाम उन्हें बेहतरीन मुनाफे के रूप में मिल रहा है।

दोस्तों की सलाह से शुरू हुआ सफर

किसान अजय प्रजापति ने खेती की शुरुआत अपने परिवार की 6 एकड़ जमीन से की थी। उस समय वे पारंपरिक तरीके से ही खेती कर रहे थे, लेकिन खेती को और अधिक लाभकारी बनाने को लेकर उनकी अपने दोस्तों से अक्सर चर्चा होती थी। दोस्तों ने उन्हें मिश्रित खेती के लाभों और अलग-अलग प्रकार की फसलों को एक साथ उगाने की तकनीक के बारे में विस्तार से समझाया। इस चर्चा ने अजय को नई सोच दी और उन्होंने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर प्रयोग करने का साहसिक निर्णय लिया। पिछले 5 वर्षों की कड़ी मेहनत और बेहतर प्रबंधन का ही नतीजा है कि आज उनके पास कुल 10 एकड़ जमीन है, जिसमें उन्होंने 4 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदकर विस्तार किया है।

विविध फसलों का मेल और कम जोखिम

अजय के खेत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविधता पर जोर देते हैं। उनके खेत में एक साथ कई तरह की फसलें तैयार की जाती हैं। इनमें मुख्य रूप से केला, कपास, गन्ना, मक्का, चना और सोयाबीन शामिल हैं। इसके अलावा वे मौसम के अनुसार खेत के एक हिस्से में तरह-तरह की सब्जी-भाजी की खेती भी करते हैं। उनका मानना है कि जब एक ही खेत में कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं, तो किसी एक फसल का दाम बाजार में गिरने पर दूसरी फसलें नुकसान की भरपाई कर देती हैं। इससे न केवल खेती का जोखिम कम होता है, बल्कि सालभर खेत से कुछ न कुछ उत्पादन मिलता रहता है। फसल का चयन करते समय वे हमेशा बाजार की मांग और बदलते मौसम का बारीकी से ध्यान रखते हैं।

मुनाफे के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार

मिश्रित खेती के इस मॉडल ने अजय के लिए आय के दरवाजे तो खोले ही हैं, साथ ही वे अपने क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बन गए हैं। इस समय उनके खेत में काम करने के लिए स्थानीय स्तर पर 8 से 10 लोगों को नियमित रोजगार मिला हुआ है। फसल की देखरेख, निराई-गुड़ाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों के लिए मजदूरों को काम देकर वे सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। अजय का अनुभव यह साबित करता है कि खेती में नई सोच और दूसरे सफल किसानों या मित्रों से मिलने वाली जानकारी का सही उपयोग करने से किसान अपनी आमदनी में बंपर उछाल ला सकते हैं। आज यह मिश्रित खेती का तरीका अजय के लिए न केवल आजीविका का सशक्त साधन है, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए रोजी-रोटी का जरिया भी बन चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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