जगदलपुर की सुनीता बघेल ने स्वदेशी उत्पादों से रची सफलता की नई कहानी, ग्रो सेंटर के जरिए कृष्णा महिला समूह को मिला नया बाजार व्यापार 43 मिनट पहले 4
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर की रहने वाली सुनीता बघेल ने स्व-सहायता समूह और ग्रो सेंटर से जुड़कर आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। स्थानीय मसाले, रागी और सत्तू के व्यंजन तथा बेल मेटल उत्पादों की बदौलत वे और उनके समूह की महिलाएं हर महीने शानदार आमदनी कर रही हैं।

महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग अंतर्गत आने वाले जगदलपुर ब्लॉक की रहने वाली सुनीता बघेल ने स्वदेशी उत्पादों के निर्माण और विपणन के जरिए आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है। महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुनीता ने न केवल अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव हासिल किया है, बल्कि अपने साथ कई अन्य महिलाओं के लिए भी नियमित रोजगार और आर्थिक तरक्की के नए रास्ते खोले हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खाद्य पदार्थों और हस्तशिल्प सामग्रियों के जरिए आज यह समूह सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साल 2019 से शुरू हुआ आत्मनिर्भर बनने का सफर

सुनीता बघेल के इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी इस सफलता की नींव वर्ष 2019 में रखी थी, जब वे पहली बार कृष्णा महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी थीं। समूह में शामिल होने के बाद उन्हें विभिन्न प्रकार के उत्पादों के निर्माण और व्यावसायिक बारीकियों का समुचित प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।

इसके पश्चात उन्होंने अपनी कार्यकुशलता के बल पर गोरी महिला ग्राम संगठन में भी सक्रियता से काम किया। महिलाओं को एकजुट करने और संगठन के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने की उनकी क्षमता को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें जीवन ज्योति महिला संकुल संगठन के सचिव पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। महिला समूह से लगातार जुड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के परिणामस्वरूप उनके आत्मविश्वास में भारी वृद्धि हुई, जिसने उन्हें अपने कामकाज को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

ग्रो सेंटर ने आसान बनाई उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री

सुनीता और उनके समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती तैयार उत्पादों को उचित बाजार दिलाना और उनकी बेहतर तरीके से बिक्री करना था। हालांकि, वर्ष 2025 में ग्रो सेंटर की स्थापना और शुरुआत होने के बाद समूह की महिलाओं की यह समस्या पूरी तरह हल हो गई।

ग्रो सेंटर के माध्यम से सुनीता बघेल और उनके साथ काम कर रही महिलाओं को अपने द्वारा बनाए गए सामानों की बिक्री और मार्केटिंग के लिए एक सुव्यवस्थित और आधुनिक मंच मिल गया। अब ग्रो सेंटर की सहायता से उनके द्वारा निर्मित सभी सामानों की मार्केटिंग और बिक्री बेहद आसानी और पारदर्शिता के साथ हो रही है, जिससे उनके उत्पादों को स्थानीय स्तर पर व्यापक पहचान मिल पा रही है।

स्थानीय मसालों से लेकर मिलेट्स के व्यंजनों तक का निर्माण

सुनीता बघेल और कृष्णा महिला समूह की सदस्य महिलाएं मिलकर बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण स्वदेशी उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। समूह द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रमुख सामानों की सूची में निम्नलिखित उत्पाद शामिल हैं:

  • शुद्ध स्थानीय मसाले: समूह की महिलाएं घर पर ही हल्दी, मिर्च, धनिया और टिकुर जैसे शुद्ध और जैविक मसाले तैयार करती हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है।
  • पौष्टिक मिलेट्स उत्पाद: स्वास्थ्यवर्धक मिलेट्स को बढ़ावा देते हुए समूह द्वारा रागी के लड्डू, सत्तू के लड्डू और रागी नमकीन तैयार किए जा रहे हैं।
  • पारंपरिक बेल मेटल उत्पाद: खान-पान की चीजों के अलावा, समूह की महिलाएं छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध हस्तकला यानी बेल मेटल के उत्पादों की बिक्री के काम से भी सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।

नियमित आमदनी और पारंपरिक कला का संरक्षण

ग्रो सेंटर के माध्यम से अपने उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने के कारण समूह की महिलाओं को हर महीने एक निश्चित और अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। इस नियमित कमाई ने न केवल इन महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उन्हें समाज में एक नया मान-सम्मान और पहचान भी प्रदान की है।

सुनीता बघेल की यह प्रेरणादायक कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि ग्रामीण और स्थानीय महिलाओं को उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और कार्य करने के अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे खुद को आत्मनिर्भर बनाकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। महिला स्व-सहायता समूहों के इस सफल मॉडल के जरिए जहां एक तरफ परिवारों का आर्थिक स्तर ऊंचा उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के स्थानीय स्वदेशी उत्पादों और समृद्ध पारंपरिक कला को भी जबरदस्त बढ़ावा मिल रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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