जहानाबाद: ट्रैक्टर चलाकर गुजारा करने वाले उपेंद्र बने सफल उद्यमी, हर महीने हो रही है लाखों की कमाई व्यापार एक घंटा पहले 4
बिहार के जहानाबाद निवासी उपेंद्र कुमार ने कभी ट्रैक्टर चलाकर मेहनत-मजदूरी की थी, लेकिन सरकारी मदद से शुरू किए गए पेवर ब्लॉक के व्यवसाय ने आज उनकी तकदीर बदल दी है।

संघर्ष से सफलता तक की कहानी

बिहार के जहानाबाद जिले के एरकी गांव के निवासी उपेंद्र कुमार की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं। एक समय था जब उपेंद्र का परिवार चलाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने कुछ बचत करके एक ट्रैक्टर खरीदा था। इस ट्रैक्टर के जरिए वे खेतों की जुताई करने, मिट्टी ढोने और गिट्टी-बालू की ढुलाई का काम करते थे। यह काम परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए तो पर्याप्त था, लेकिन उपेंद्र की महत्वाकांक्षा इससे कहीं अधिक थी। वे जीवन में कुछ ऐसा करना चाहते थे जिससे न केवल उनकी खुद की आर्थिक स्थिति बेहतर हो, बल्कि वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें।

बिहार सरकार की योजना बनी सहारा

उपेंद्र कुमार ने बताया कि वे लंबे समय से किसी बड़े व्यवसाय की तलाश में थे। इसी दौरान उन्हें बिहार सरकार की मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने पूरी लगन के साथ इस योजना के लिए आवेदन किया। सौभाग्य से, उनका चयन इस योजना के लिए हो गया और उन्हें व्यापार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये की राशि बतौर ऋण प्राप्त हुई। इस पूंजी के साथ ही उपेंद्र के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने कंक्रीट की ईंट यानी पेवर ब्लॉक बनाने का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने जहानाबाद जिला उद्योग विभाग से भी जरूरी सहायता प्राप्त की।

व्यवसाय का विस्तार और बढ़ता मुनाफा

पेवर ब्लॉक निर्माण का काम शुरू होने के बाद उपेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज स्थिति यह है कि उनका काम काफी फैल चुका है। उपेंद्र के अनुसार, अब वे हर साल लगभग 10 लाख ईंटों की आपूर्ति कर रहे हैं। उनके इस व्यवसाय का नेटवर्क केवल जहानाबाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनकी ईंटें अरवल, पटना, गयाजी और नालंदा जैसे जिलों के विभिन्न हिस्सों में भी पहुंच रही हैं। मांग इतनी अधिक रहती है कि कई बार तो वे पूरी मांग को पूरा करने में भी सक्षम नहीं हो पाते। व्यवसाय की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे अब हर महीने 80 हजार से 90 हजार रुपये तक कमा रहे हैं, जो कभी-कभी बढ़कर 1 लाख रुपये तक भी पहुंच जाता है।

दूसरों के लिए बने रोजगार का जरिया

उपेंद्र की इस कामयाबी की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि उन्होंने अकेले तरक्की नहीं की। उनके इस व्यवसाय के साथ वर्तमान में 12 लोग प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इन लोगों को उपेंद्र के प्लांट में काम मिलने से उनकी रोजी-रोटी चल रही है। एक समय में ट्रैक्टर चलाकर अपना गुजारा करने वाले उपेंद्र आज दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने वाले एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उनका अनुभव यह साबित करता है कि यदि सही सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जाए और पूरी निष्ठा के साथ कड़ी मेहनत की जाए, तो किसी भी छोटे काम से एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है। उनकी सफलता की यह यात्रा जहानाबाद के अन्य युवाओं के लिए भी एक मिसाल बन गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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