जहानाबाद के इंजीनियरिंग छात्रों ने बनाया कमाल का उपकरण, बिना बिजली के अब सुरक्षित रहेगा दूध व्यापार 3 घंटे पहले 4
जहानाबाद सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने एक खास मिल्क चिलिंग केन विकसित किया है जो बिना बिजली के दूध को लंबे समय तक ठंडा रख सकता है। यह नवाचार किसानों को दूध खराब होने से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाएगा।

किसानों के लिए वरदान बना छात्रों का नवाचार

बिहार के जहानाबाद से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जहानाबाद सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रतिभावान छात्रों ने डेयरी उद्योग और किसानों के लिए एक बड़ी राहत वाली तकनीक विकसित की है। छात्रों की एक टीम ने एक ऐसा स्मार्ट मिल्क चिलिंग केन तैयार किया है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना बिजली के दूध को ठंडा रखने में सक्षम है। यह तकनीक उन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जो दूर-दराज के इलाकों से दूध एकत्र करके डेयरी कंपनियों तक पहुँचाते हैं। परिवहन के दौरान तापमान बढ़ने से अक्सर दूध के खराब होने का डर बना रहता है, लेकिन इस नए आविष्कार से अब किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।

स्मार्ट इंडिया हैकथॉन से मिली प्रेरणा

इस प्रोजेक्ट के पीछे इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ऋतिक राज, सत्यम कुमार और उनकी पूरी टीम की मेहनत शामिल है। छात्रों ने बताया कि इस विचार की शुरुआत स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान हुई। उस समय उन्होंने गौर किया कि ग्रामीण इलाकों से डेयरी तक दूध पहुँचने में जो समय लगता है, उस दौरान गर्मी के कारण दूध की गुणवत्ता में काफी गिरावट आ जाती है। कई बार कंपनियां मानक गुणवत्ता न होने के कारण दूध लेने से मना कर देती हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर किसानों को भुगतना पड़ता है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था पर काम करने का फैसला लिया, जो बिना किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत के काम कर सके।

PCM तकनीक का अनूठा उपयोग

छात्र सत्यम कुमार ने अपने इस प्रोजेक्ट को डेयरी टेक नाम दिया है। इस केन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए उन्होंने PCM यानी Phase Change Material तकनीक का सहारा लिया है। यह तकनीक दूध के तापमान को एक निर्धारित स्तर पर बनाए रखने में मदद करती है। बिना बिजली के चलने वाला यह कंटेनर परिवहन के दौरान इंसुलेशन की तरह काम करता है, जिससे बाहरी गर्मी का असर दूध पर नहीं पड़ता। छात्रों का दावा है कि यह तकनीक न केवल दूध को खराब होने से बचाएगी, बल्कि इसकी शुद्धता और पोषण को भी बरकरार रखेगी।

किफायती और सुलभ विकल्प

बाजार में उपलब्ध सामान्य कंटेनरों की तुलना में यह स्मार्ट केन किसानों की जेब के अनुकूल होने वाला है। छात्रों के अनुसार, बाजार में मौजूद साधारण कंटेनरों की कीमत लगभग ₹8 हजार तक होती है, लेकिन उनमें दूध ठंडा रखने की कोई विशेष व्यवस्था नहीं होती। उनकी टीम का लक्ष्य इस स्मार्ट मिल्क चिलिंग केन को करीब ₹12 हजार की लागत पर बाजार में उतारना है। यह मामूली अंतर किसानों को दूध बर्बाद होने से बचाकर होने वाले भारी नुकसान से निजात दिलाएगा।

डेयरी व्यवसाय में क्रांति की उम्मीद

यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के किसानों के लिए बहुत उपयोगी है जो गांव से दूध इकट्ठा कर बड़े शहरों या दूर स्थित डेयरी संयंत्रों तक पहुँचाते हैं। परिवहन के दौरान अक्सर दूध के फटने या उसकी गुणवत्ता कम होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल पाता था। जहानाबाद के इन छात्रों के प्रयास से अब डेयरी सप्लाई चेन में सुधार आने की उम्मीद है। यह नवाचार न केवल तकनीकी कौशल का प्रमाण है, बल्कि समाज के प्रति इंजीनियरिंग छात्रों की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। आने वाले समय में अगर इसे बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए भेजा जाता है, तो यह डेयरी क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप