सीहोर: स्कूल बस से अचानक उठा धुआं, जान बचाने के लिए कूद पड़े मासूम बच्चे, फिटनेस जांच पर उठे बड़े सवाल मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 79
मध्य प्रदेश के सीहोर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा में भारी लापरवाही सामने आई है। फिटनेस जांच के महज तीन दिन बाद ही स्कूल बस में धुआं निकलने से हड़कंप मच गया और बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए बस से भागना पड़ा।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत चिंताजनक मामला सामने आया है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय यह मानकर निश्चिंत रहते हैं कि वे सुरक्षित हाथों में हैं, लेकिन हाल ही में घटी एक घटना ने इस भरोसे की नींव हिला दी है। जिले के मनूबेन सांदीपनी स्कूल (CM राइज) की एक बस जब रास्ते में थी, तो उसमें से अचानक भीषण धुआं निकलने लगा। बस के अंदर धुआं भरते ही बच्चों में अफरा-तफरी मच गई और डर के मारे छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए बस से बाहर भागना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी भी माता-पिता की रूह कांप सकती है।

फिटनेस जांच के दावों की खुली पोल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना के महज तीन दिन पहले ही 22 जुलाई 2026 को जिला परिवहन कार्यालय में समिति द्वारा इन बसों की फिटनेस की जांच की गई थी। उस समय यह दावा किया गया था कि सभी बसें सुरक्षित हैं। अब महज 3 दिनों के अंतराल में ही बस के इस खस्ताहाल होने ने जिला परिवहन कार्यालय (RTO) और जांच समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट है कि कागजों पर सब कुछ ठीक दिखाया गया, जबकि धरातल पर स्थिति बेहद खतरनाक थी।

प्रशासन की लापरवाही और शिक्षा विभाग पर सवाल

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े आरोप लगाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फिटनेस जांच के लिए केवल नई और अच्छी स्थिति वाली बसों को ही आरटीओ के समक्ष पेश किया गया था, जबकि जिन बसों में तकनीकी खामियां थीं, उन्हें जानबूझकर जांच से दूर रखा गया। जिले में लंबे समय से जर्जर और बिना सुरक्षा मानकों वाली खटारा बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इन सब से अनजान बने हुए हैं।

नाराज अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने अब मांग की है कि जिले की सभी स्कूल बसों की तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले बस संचालकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही मध्य प्रदेश के विदिशा से भी एक ऐसी ही दुखद घटना सामने आई थी, जहां एक स्कूल बस नदी में गिर गई थी और उस हादसे में कई बच्चे घायल हो गए थे। यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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