जम्मू-कश्मीर
3 महीने पहले
130
विचारों
सोपोर में हुआ बड़ा हादसा टला
शुक्रवार को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर स्थित वाटरगाम इलाके में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तीसरी मंजिल पर अचानक आग की लपटें दिखाई देने लगीं। यह कॉम्प्लेक्स एक पेट्रोल पंप के काफी नजदीक स्थित था, जिससे आग के विकराल रूप धारण करने की आशंका और अधिक बढ़ गई थी। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो क्षेत्र में एक भीषण त्रासदी हो सकती थी।
संयुक्त बचाव अभियान की भूमिका
आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर सुरक्षा एजेंसियों ने तत्परता दिखाई। जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना की 32 राष्ट्रीय राइफल्स की टीमें तुरंत घटना स्थल पर पहुंचीं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कर्मचारी भी दमकल गाड़ियों के साथ मौके पर तैनात हो गए। बचाव कार्य को सफल बनाने में स्थानीय निवासियों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों ने दमकलकर्मियों और सुरक्षाबलों की भरपूर मदद की, जिससे आग को आस-पास की अन्य इमारतों तक फैलने से रोकने में बड़ी सफलता मिली।
देश में आग की बढ़ती घटनाएं और सुरक्षा का सवाल
पिछले कुछ महीनों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में आग लगने की कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इन हादसों के पीछे अक्सर फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी, बिजली के उपकरणों में शॉर्ट सर्किट, भीड़भाड़ वाले इलाके और आपातकालीन निकास मार्गों की कमी जैसे मुख्य कारण सामने आते हैं। इन हादसों ने शहरी ढांचे और अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाल के कुछ प्रमुख अग्निकांड
- 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर स्थित 'फ्लरिश स्टे' होटल में एक बेहद भीषण आग लगी थी। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जांच में सामने आया था कि इमारत में फायर एनओसी (NOC) नहीं थी, बाहर निकलने के रास्ते बंद थे और क्षमता से अधिक भीड़ वहां मौजूद थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए मुआवजे का एलान भी किया था।
- 22 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 14 से 15 छात्रों की मौत हो गई। यह आग एक तीन मंजिला कमर्शियल इमारत में लगी थी, जहां एनीमेशन और गेमिंग की कोचिंग के साथ ही लाइब्रेरी भी संचालित होती थी। पीड़ित छात्र अधिकतर 16 से 18 साल के आयु वर्ग के थे। जान बचाने की जद्दोजहद में छात्र खिड़कियों से कूदने को मजबूर हुए थे। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश के कोचिंग सेंटर्स पर कड़ी छापेमारी की कार्रवाई शुरू की।
- जून के ही महीने में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक अस्पताल में भी आग का तांडव देखने को मिला। आग अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगी थी, जिसके बाद अस्पताल के कई कर्मचारी वहां से हट गए थे। उस कठिन समय में मरीजों के परिजनों ने साहस दिखाते हुए अपने स्तर पर मरीजों को बाहर निकालकर उनकी जान बचाई, हालांकि इस हादसे में भी कई मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
- इससे पूर्व, जनवरी के महीने में कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में भी आग लगने का मामला सामने आया था, जिसमें 16 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
Comments
0 comment