सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद तोड़ा अनशन, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने पिलाया जूस भारत एक महीने पहले 49
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल गुरुवार देर रात खत्म कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्वास्थ्य के लिए चिंता जताते हुए जल्द ठीक होने की प्रार्थना की है।

अनशन का समापन और घटनाक्रम

नीट परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर से अपनी आवाज बुलंद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार 26 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। गुरुवार की आधी रात के बाद गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। इस दौरान लेह-लद्दाख की प्रमुख संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी भी वहां मौजूद रहे।

सांसदों की अपील और बातचीत का असर

अनशन समाप्त करने के निर्णय के पीछे के कारणों पर चर्चा करते हुए सोनम वांगचुक ने खुलासा किया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 65 सांसदों ने उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर या पत्र लिखकर अनशन खत्म करने का विनम्र आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला देश में किसी भी तरह की संभावित हिंसा को टालने और विभिन्न स्तरों पर हुई लंबी बातचीत के बाद लिया गया है। वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समर्थकों को सूचित किया कि वे जल्द ही एक वीडियो जारी करेंगे, जिसमें वे अनशन समाप्त करने की शर्तों और पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से सतर्क रहने और शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक के उपवास तोड़ने की खबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वे सोनम जी से आग्रह करते हैं कि वे डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देते हुए जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करें। प्रधानमंत्री ने ईश्वर से उनकी दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।

अस्पताल में भर्ती होने तक का सफर

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने 28 जून को नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। वे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में आंदोलन कर रहे थे। लंबे समय तक कुछ भी न खाने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ती गई, जिसके बाद उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें बेहतर उपचार के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। अस्पताल में रहने के दौरान भी वे लगातार छात्रों का मनोबल बढ़ाते रहे और उन तक अपने संदेश पहुंचाते रहे। उनके साथ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने भी स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उनसे अनशन वापस लेने की मांग की थी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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