गर्मी में नहीं, इस मौसम में होता है सोलर पैनल से सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन; हैरान कर देगा ये सच बिहार 3 महीने पहले 124
आमतौर पर माना जाता है कि चिलचिलाती गर्मी में सोलर पैनल सबसे ज्यादा बिजली बनाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तथ्य कुछ और ही हैं। सोलर पैनल की कार्यक्षमता अत्यधिक तापमान में कम हो जाती है।

सोलर पैनल और बिजली उत्पादन का सच

आज के दौर में बिजली की बढ़ती जरूरतों और महंगी दरों के कारण आम लोगों के बीच सोलर पैनल लगवाने का चलन काफी बढ़ गया है। जहानाबाद सहित पूरे देश में कई घरों और व्यावसायिक संस्थानों की छतों पर सोलर प्लेट्स देखी जा सकती हैं। अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बनी रहती है कि जितनी तेज धूप और जितनी ज्यादा गर्मी होगी, सोलर पैनल उतनी ही अधिक बिजली का निर्माण करेंगे। हालांकि, यह पूरी तरह सही नहीं है। हकीकत यह है कि सोलर पैनल अत्यधिक गर्मी में उतने प्रभावी नहीं रह जाते, जितना कि सामान्य तापमान वाले दिनों में होते हैं।

तापमान का बिजली पर असर

इस विषय को समझने के लिए हमने जहानाबाद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और फोटोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर तथा पंजीकृत सोलर वेंडर दिव्य प्रकाश से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल के प्रदर्शन का सीधा संबंध सूर्य के प्रकाश से तो है, लेकिन गर्मी से इसका उल्टा रिश्ता है। सोलर पैनल की क्षमता का परीक्षण प्रयोगशालाओं में आमतौर पर 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर किया जाता है। जैसे ही तापमान इस आदर्श स्तर से ऊपर जाता है, पैनल की कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है।

कितनी घटती है बिजली की पैदावार

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपके घर में 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा है, तो सामान्य परिस्थितियों में यह एक महीने में करीब 350 से 400 यूनिट बिजली बना सकता है। दिव्य प्रकाश का स्पष्ट मानना है कि तापमान में हर 1 डिग्री की बढ़ोतरी पैनल के आउटपुट को प्रभावित करती है। जैसे ही तापमान 25 डिग्री से ऊपर जाता है, बिजली उत्पादन में लगभग .5 प्रतिशत की कमी आने लगती है। इसलिए, भीषण गर्मी के दौरान सोलर पैनल जितनी बिजली पैदा करते हैं, उससे कहीं अधिक कुशल वे सामान्य मौसम में होते हैं क्योंकि तब धूप तो खिली रहती है, लेकिन तापमान नियंत्रण में रहता है।

बरसात और सर्दियों का गणित

सोलर ऊर्जा को लेकर एक और आम भ्रांति यह है कि बारिश के मौसम में बिजली उत्पादन नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सच नहीं है। बारिश के दौरान भी सोलर पैनल बिजली बनाते हैं। जब तक सूर्य की रोशनी बादलों के बीच से भी पैनल तक पहुंचती रहती है, तब तक उत्पादन जारी रहता है।

सर्दियों के मौसम की बात करें तो उत्पादन पर थोड़ा असर जरूर पड़ता है। हालांकि इसके पीछे कारण ठंड नहीं, बल्कि दिन की अवधि का छोटा होना है। सर्दियों में सूर्य जल्दी ढल जाता है और रोशनी कम समय के लिए उपलब्ध रहती है, जिससे कुल बिजली उत्पादन प्रभावित होता है। वर्ष के दौरान सबसे कम बिजली उत्पादन की स्थिति आमतौर पर दिसंबर और जनवरी के महीनों में देखने को मिलती है, क्योंकि इन दिनों सूरज की रोशनी के घंटे न्यूनतम हो जाते हैं।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जाए तो सोलर पैनल के लिए सबसे अनुकूल स्थिति वही है जहां सूर्य की रोशनी प्रचुर मात्रा में हो लेकिन वातावरण का तापमान बहुत अधिक न हो। इसलिए, अत्यधिक गर्मी के बजाय मध्यम तापमान वाले दिन सोलर पैनल से सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन के लिए सबसे बेहतर माने जाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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