हरियाणा
एक घंटा पहले
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गुरुग्राम के सोहना में पुलिस का एनकाउंटर
हरियाणा के गुरुग्राम जिले के सोहना क्षेत्र में आज सुबह पुलिस और बदमाशों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ की खबर सामने आई है। नूंह क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी एक थार गाड़ी में गायों की तस्करी कर रहे हैं। पुलिस ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। इस जवाबी कार्रवाई में शाहिद उर्फ आडवाणी नाम का एक वांछित अपराधी मारा गया, जबकि उसके दो साथी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार होने में सफल रहे। पुलिस ने थार गाड़ी में मिली दो गायों को सुरक्षित छुड़ा लिया है और उन्हें गौशाला भेज दिया है।
पुलिस घेराबंदी और फायरिंग का घटनाक्रम
यह पूरी घटना गुरुग्राम और नूंह सीमा के समीप भिवरावटी से सिलानी जाने वाले रास्ते पर हुई। नूंह क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को तड़के करीब चार बजे इस तस्करी की गुप्त जानकारी मिली थी। सतर्क पुलिस टीम ने इलाके में सघन चेकिंग शुरू की। जल्द ही फरीदाबाद नंबर की एक थार गाड़ी आती दिखी, जिसमें तीन लोग सवार थे। पुलिस ने जब गाड़ी को रुकने का इशारा किया तो बदमाशों ने टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी फायरिंग की, जिसमें शाहिद को गोली लग गई और उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दो अन्य आरोपी मौके का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे।
जांच और साक्ष्यों का संग्रह
घटना की सूचना मिलते ही सोहना सदर थाना पुलिस की टीम, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और सीन ऑफ क्राइम यूनिट मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृत अपराधी के शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए सोहना के नागरिक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया है। पशु चिकित्सा अधिकारी को घटनास्थल पर बुलाकर थार में बरामद की गई दोनों गायों की जांच करवाई गई और उन्हें सुरक्षित रूप से नजदीकी गौशाला भिजवा दिया गया है। फिलहाल, फरार चल रहे दोनों बदमाशों की तलाश में पुलिस की विभिन्न टीमें छापेमारी कर रही हैं और घटनास्थल से जरूरी सबूत जुटाए जा रहे हैं।
अपराधों का लंबा रिकॉर्ड
मारे गए अपराधी शाहिद उर्फ आडवाणी का आपराधिक इतिहास काफी लंबा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ लगभग 30 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। शाहिद का नाम एटीएम चोरी और लूटपाट जैसी बड़ी वारदातों में भी प्रमुखता से शामिल रहा है। उसे वर्ष 2018 में बिलासपुर क्राइम ब्रांच ने एक मुठभेड़ के दौरान पकड़ा था, तब वह घायल हो गया था। उस समय इलाज के बाद जब पुलिस उसे रिमांड पर ले रही थी, तो वह हिरासत से चकमा देकर फरार हो गया था। तब से ही पुलिस को उसकी सरगर्मी से तलाश थी। सोहना मुठभेड़ के साथ ही पुलिस की लंबी खोज अब समाप्त हो गई है, लेकिन फरार साथियों को पकड़ना अब पुलिस के लिए चुनौती है।
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