सीकर: मोचीवाड़ा श्मशान मार्ग पर जलभराव से बढ़ी मुश्किलें, कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर परिजन राजस्थान 2 महीने पहले 86
सीकर के मोचीवाड़ा श्मशान मार्ग पर लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। नगर परिषद की अनदेखी के चलते अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

श्मशान जाने वाले मुख्य मार्ग की खराब स्थिति

राजस्थान के सीकर शहर में मोचीवाड़ा स्थित श्मशान भूमि का रास्ता इन दिनों बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। इस मार्ग पर लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके कारण स्थानीय लोग और अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि शव यात्राओं को मजबूरन गंदे पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ता है।

प्रशासन की लापरवाही और स्थानीय लोगों का गुस्सा

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद के अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। निवासी संतोष कुमार खटीक के अनुसार, इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त को लिखित और मौखिक रूप से कई बार अवगत कराया गया है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से कोई भी सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे लोगों में काफी रोष है।

बिना बारिश के भी जलभराव की स्थिति

हैरानी की बात यह है कि सड़क पर पानी केवल बारिश के दौरान ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी जमा रहता है। लोगों का आरोप है कि नालियों की सफाई न होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण स्थिति और विकट हो गई है। बरसात के मौसम में तो यहां से निकलना भी जानलेवा और दूभर हो जाता है, क्योंकि सड़क पर गंदा पानी भर जाता है।

आंदोलन की चेतावनी

नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए नालियों की सफाई करवाएं ताकि आम लोगों को इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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