अपराध की दुनिया से मातृत्व के सफर तक: राजस्थान की 'लेडी डॉन' अनुराधा चौधरी की जिंदगी में आया बड़ा बदलाव राजस्थान 2 महीने पहले 64
सीकर की चर्चित अनुराधा चौधरी उर्फ मैडम मिंज अब जुड़वा बेटियों की मां बन चुकी हैं। कभी खतरनाक गैंगस्टरों की साथी रही अनुराधा अब अपराध का रास्ता छोड़ कानून की पढ़ाई कर रही हैं।

राजस्थान के अपराध जगत का एक बेहद चर्चित और सनसनीखेज नाम रही सीकर की अनुराधा चौधरी उर्फ मैडम मिंज आज अपनी जिंदगी के एक बिल्कुल अलग पड़ाव को लेकर सुर्खियों में हैं। एक समय था जब उनका नाम सुनते ही पुलिस महकमे में हलचल मच जाती थी और उनकी पहचान गैंगस्टर आनंदपाल सिंह और फिर दिल्ली-हरियाणा के गैंगस्टर काला जठेड़ी से जुड़ी खबरों के कारण होती थी। लेकिन आज वही अनुराधा अपनी दो नवजात जुड़वा बेटियों और एक पूरी तरह बदल चुकी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। उनकी यह कहानी एक आम मध्यवर्गीय लड़की से शुरू होकर अपराध के दलदल और फिर वहां से मातृत्व और कानून की पढ़ाई तक पहुंचने के अनोखे सफर को दर्शाती है।

साधारण लड़की से 'मैडम मिंज' बनने की शुरुआत

अनुराधा चौधरी की कहानी की शुरुआत किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है। राजस्थान के सीकर जिले के एक बेहद शांत और छोटे से गांव अल्सर में जन्मी अनुराधा का बचपन पूरी तरह से सामान्य था। बचपन में ही उनकी मां का साया सिर से उठ गया था, जिसके बाद उनके पिता ने ही उन्हें मां और बाप दोनों का प्यार दिया। पिता उन्हें प्यार से 'मिंटू' कहकर बुलाते थे। पढ़ाई-लिखाई में बेहद होशियार अनुराधा ने कंप्यूटर विज्ञान में बीसीए (BCA) की डिग्री हासिल की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर के लिए शेयर बाजार के कारोबार को चुना।

शुरुआती दिनों में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, लेकिन जिंदगी को कुछ और ही मंजूर था। व्यापार में एक करीबी कारोबारी साझेदार ने उनके साथ कथित तौर पर बड़ी धोखाधड़ी की। इस धोखे के कारण अनुराधा को करीब एक करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा और वह कर्ज के गहरे दलदल में डूब गईं। लेनदारों के बढ़ते दबाव और अचानक बदले हालातों ने उन्हें एक ऐसे रास्ते पर लाकर खड़ा कर दिया जहां से वापसी का कोई सीधा रास्ता नहीं था।

गैंगस्टर आनंदपाल सिंह से मुलाकात और जुर्म की दुनिया में कदम

अपने भारी कर्ज और मुश्किलों से निपटने के लिए जब अनुराधा को कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने मदद की तलाश शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजस्थान के सबसे कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह से हुई। शुरुआत में अनुराधा को केवल अपनी सुरक्षा की जरूरत थी, लेकिन उनकी अच्छी शिक्षा, अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ और दस्तावेजों को समझने की काबिलियत ने जल्द ही उन्हें आनंदपाल के बेहद करीब ला दिया। वह आनंदपाल गैंग के कानूनी मामलों और कागजी कार्रवाई को संभालने लगीं।

देखते ही देखते वह आनंदपाल सिंह की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गईं और अपराध की दुनिया में लोग उन्हें 'मैडम मिंज' के नाम से पुकारने लगे। हालांकि, अनुराधा ने हमेशा अदालतों और मीडिया के सामने इस बात पर जोर दिया कि आनंदपाल सिंह के साथ उनका रिश्ता पूरी तरह से पेशेवर था और वे केवल कानूनी मामलों में ही उनकी मदद करती थीं।

आनंदपाल का एनकाउंटर और हरियाणा के गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी से जुड़ाव

वक्त ने एक बार फिर करवट बदली और पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में आनंदपाल सिंह मारा गया। इसके बाद अनुराधा की जिंदगी में एक बड़ा खालीपन और असुरक्षा का माहौल बन गया। इसी दौरान उनका संपर्क हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी से हुआ। अनुराधा की तेज-तर्रार अंग्रेजी बोलने की शैली, उनका गजब का आत्मविश्वास और देश के कानून की गहरी समझ ने संदीप को बहुत प्रभावित किया।

जल्द ही दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। पुलिस की नजरों से बचने के लिए दोनों ने देश के कई राज्यों में अपनी पहचान छुपाकर समय काटा। दोनों लंबे समय तक फरार रहे, लेकिन आखिरकार साल 2021 में कानून के हाथ उन तक पहुंच गए और पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया।

आईवीएफ तकनीक से जुड़वा बेटियों का जन्म और पैरोल

जेल की सलाखों, अदालती तारीखों और कानूनी लड़ाइयों के बीच भी अनुराधा और संदीप का रिश्ता कमजोर नहीं पड़ा। दोनों ने शादी करने का फैसला किया और शादी के बंधन में बंध गए। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा।

काला जठेड़ी के जेल में बंद होने के कारण अनुराधा ने मातृत्व का सुख पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और आईवीएफ (IVF) तकनीक का सहारा लेने की अनुमति मांगी। अदालत से मंजूरी मिलने के बाद अनुराधा ने आईवीएफ तकनीक के जरिए दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया। इन मासूम बच्चियों के जन्म के बाद कोर्ट ने मानवीय आधार पर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को कस्टडी पैरोल की मंजूरी दी, ताकि वह पहली बार अपनी पत्नी और दोनों नवजात बेटियों से मुलाकात कर सके। अस्पताल के भीतर हुई सुरक्षाकर्मियों के पहरे के बीच यह मुलाकात काफी भावुक और चर्चा का विषय रही।

हथियार और जुर्म छोड़ अब हाथों में हैं कानून की किताबें

आज अनुराधा चौधरी की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है। अब वह पुलिस और अदालतों के चक्कर सिर्फ मुकदमों की पैरवी के लिए नहीं, बल्कि अपनी नई जिंदगी को संवारने के लिए लगा रही हैं। वर्तमान में वह कानून की पढ़ाई यानी एलएलबी (LLB) कर रही हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि वह अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी कर अपने पति संदीप के मामलों की कानूनी पैरवी खुद अदालत में करना चाहती हैं।

जिन हाथों में कभी अपराध और गैंगस्टरों की मदद करने के आरोप लगे थे, आज उन्हीं हाथों में कानून की मोटी-मोटी किताबें और अपनी दो प्यारी बेटियों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है। अनुराधा का यह पूरा सफर साबित करता है कि परिस्थितियां कितनी भी विकट क्यों न हों, इंसान अगर चाहे तो अपनी जिंदगी को एक नया और सकारात्मक मोड़ दे सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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