भोपाल: रिहायशी इलाकों में दुकानों पर ताले, व्यापारियों ने दी आत्महत्या की धमकी मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक दुकानों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू की है, जिसका व्यापारी वर्ग कड़ा विरोध कर रहा है।

भोपाल में दुकानों पर कार्रवाई से मचा हड़कंप

सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासन का बुलडोजर रिहायशी इलाकों में बनी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर चला है। नगर निगम की ओर से भोपाल के प्रमुख पॉश क्षेत्र E4 में रिहायशी जमीन पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करवाया जा रहा है। इस कार्रवाई की जद में न केवल E4, बल्कि E1 से लेकर E7 क्षेत्र और रोहित नगर जैसे तमाम इलाके आ गए हैं। कार्रवाई से आहत व्यापारियों ने सरकार के रवैये पर तीखा गुस्सा जाहिर किया है और चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राहत नहीं मिली, तो वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर होंगे।

मास्टर प्लान की कमी का आरोप

व्यापारियों का तर्क है कि इस पूरे संकट की जड़ सरकार की नाकामी है। उनका आरोप है कि सरकार पिछले 21 सालों से, यानी वर्ष 2005 से लेकर 2026 तक कोई नया मास्टर प्लान तैयार ही नहीं कर पाई है। एक प्रभावित व्यापारी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मुख्य सड़क पर यह सोचकर प्लॉट खरीदा था कि वह व्यावसायिक उपयोग के योग्य है। व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि सरकार को गुजरात के मॉडल को अपनाना चाहिए, जहाँ एक निश्चित शुल्क वसूलकर रिहायशी संपत्तियों को व्यावसायिक उपयोग के लिए नियमित करने का प्रावधान है। उनका दावा है कि ऐसी समस्या केवल भोपाल तक सीमित है क्योंकि अन्य राज्यों में मास्टर प्लान सही ढंग से लागू है। व्यापारियों का कहना है कि पूरे नया भोपाल क्षेत्र को बंद कर दिया गया है, जिससे लगभग 90 प्रतिशत दुकानें बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये दुकानें बंद हो गईं, तो आम जनता तक दूध और दवाओं जैसी जरूरी चीजें कैसे पहुँचेंगी। साथ ही, कर्ज की किश्तें न चुका पाने के कारण रिकवरी एजेंटों का दबाव बढ़ गया है, जिससे वे आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं।

व्यावसायिक शुल्क और जीएसटी का मुद्दा

दुकानदारों ने यह भी बताया कि उनसे नगर निगम द्वारा सालाना 12,000 रुपये का व्यावसायिक लाइसेंस शुल्क लिया जाता है और वे बिजली का भुगतान भी कमर्शियल दरों पर कर रहे हैं। E1 से लेकर E7 तक के बाजारों की मासिक बिक्री 300 करोड़ रुपये से अधिक है, जिससे सरकार को भारी मात्रा में GST भी प्राप्त होता है। व्यापारियों ने याद दिलाया कि BRTS और मेट्रो परियोजना के समय यह तय हुआ था कि प्रत्येक 80 फीट चौड़ी सड़क पर मिक्स्ड लैंड यूज की अनुमति दी जाएगी। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए और बिना देरी किए मिक्स्ड लैंड यूज को लागू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वे पिछले 25 से 50 सालों से अपना व्यापार चला रहे हैं और इस कार्रवाई से सीधे तौर पर 30,000 से 35,000 लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

रहवासियों का विरोध प्रदर्शन

दूसरी ओर, गौतम नगर के स्थानीय निवासी रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। रहवासियों का कहना है कि रिहायशी बस्तियों में चलने वाली ये दुकानें पूरी तरह अवैध हैं और इन्हें तुरंत प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई को केवल खानापूर्ति करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की मांग की है। स्थानीय निवासी हाथों में तख्तियां लेकर विरोध मार्च निकाल रहे हैं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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